साईं अमृत वाणी – अध्याय 3

साईं अमृत वाणी - अध्याय 3

साईं से प्यार

साईं जब भी मुझे भूख लगे तब अपने कोमल हाथों से खिला देना, अगर ये आंखो में कभी भी आंसू आए तो बाबा अपने स्नेह भरा हाथों से पोछ देना ये मेरे दो नयन की अश्रुधारा|

अगर मैं कुछ करने जाऊ और मुझे कुछ समझ न आए तो बाबा आप मुझे समझा देना।

साईं इस जन्म में तो नहीं होगा, लेकिन अगले जनम मैं मुझे फुल बना के जन्म देना क्युकि ये फूल ही हैं जो हर वक्त आपके श्री चरणों मैं रह पाता हैं, ठीक उस फूल की तरह मैं भी आपके चरणों में लिपट कर रह पाऊ साईं ।

साईं अगर बनाना हैं तो मुझे एक दीपक बनाना, ताकि मैं खुद जलकर दूसरो की जीवन उजागर कर सकूँ, जैसे एक दीपक जलने के बाद से अंत तक सभी को रोशनी देता हैं निस्वार्थ मन से दूसरो के लिए कुछ सेवा कर पाओ मैं।

साईं जब से आपको सब कुछ सौप दिया तब से ही ये जीवन स्वर्ग जैसा लागे मुझे, सुख क्या हैं इसका ज्ञान मिला आपसे साईं बाबा।

हे साईं मेरा नमन स्वीकार आपको, ये कर्म तेरा ये धर्म तेरा मानव जीवन का अर्थ भी तेरा, तूने ही लाया इस धरती पर मुझे अब स्वर्ग लगा मुझे साईं।

साईं आप हो दयामय बाबा और करुणानिधान आप हो, साईं लिख देना अपना नाम मेरे पूरे शरीर पर अपने ही स्याही से साईं, जब मुझे मुक्ति देना साईं इस जग से तब मेरा सिर सिर्फ आपके गोदी में हो और मुँह में सिर्फ आपका साईं नाम हो और हम दोनो एकसाथ द्वारकामाई मैं बैठे हुए हो।

साभार: SAI Jitu Ghosh

© साईं तेरी लीलाMember of SaiYugNetwork.com

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Hetal Patil
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