साईं अमृत वाणी – अध्याय 2

साईं अमृत वाणी - अध्याय 2

“साई भक्ति”

“साई भक्ति” एक ऐसी भक्ति हैं जिसका कोई पार नहीं हैं, इस रास्ते पर आप जितना हो सके चलते रहिए | एक दिन आपको साई जरूर मिलेंगे।

अगर आप मेहसूस करोगे तो आपको पता चलेगा की अगरबत्ती की सुगंध हैं उससे कई गुना ज्यादा सुगंध तो साई की भक्ति से होती हैं।

साई ही तो सारा जगत हैं, “साई बाबा” बनके इस जगत की रचना की हैं और “साई मां” बनके हम लोगों का लालन पालन कर रहे हैं।

हर रोज हम नही जानते की हम जाने अंजाने मैं कितने गलती करते हैं| लेकिन साई को इसकी पूरी जानकारी होती हैं, तो हमें साई से निवेदन करना चाहिए की “हे साई” आप तो सब जानते हो, अगर हमसे कुछ भूल होती हैं तो उस भूल को आप अपने धूनी मैं जला देना और हमें सही दिशा दिखाना।

अगर आप साई की भक्ति बिना अपेक्षा करते हो, तो मेरे साई आपको बहुत जल्द दर्शन देंगे और आपको सही रास्ते पे चलने की हिम्मत भी देंगे।

साई भक्ति रस पान कर अगर आप साई के दी हुई वचनो का सही तरीके से पालन करते हो तो आपको साई कृपा प्राप्त होगी।

अगर कुछ अच्छा काम करते हो जैसे किसी की मदद या सेवा करना| उसको करने के बाद आप गिनती मत करना की हा आज मैने इतने अच्छे काम किए हैं और कुछ दिन बित जाने के बाद, आपको ये ऐहसास हुआ की साई मैं तो सभी का भला करता हूं तो मेरे साथ क्यों भला नहीं होता हैं, मेरे एक बात सभी हमेशा याद रखना की आप जो अच्छे या बूरे काम करते हो इसका पूरा हिसाब साई की डायरी में हर रोज लिखा जाता हैं| अगर आप सच्चे मन से कोइ भी अच्छा काम करते हो तो उसके बदले कुछ पाने कि उपेक्षा मन में कभी मत लाना, जब जब निस्वार्थ् मन से कार्य करते है तो साईं बहुत खुश होते है|

साभार: SAI Jitu Ghosh

© साईं तेरी लीलाMember of SaiYugNetwork.com

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Hetal Patil
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