साईं भक्त भूषण: बार-बार शिर्डी जाने की इच्छा कभी समाप्त नहीं होती

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साईं भक्त भूषण कहते हैं: हेतालजी, जय साई रामजी। बाबा हम सभी पर अपना आशीर्वाद बनाएं रखे। मैंने आपको शिरडी से एक मेल भेजा था, जिसमें मैंने लगभग सभी साईं भक्तों की(जिन्होंने 7 मार्च, 2009 के 3 बजे या उससे पहले अपनी प्रार्थना भेजी थी) प्रार्थनाओ की स्वीकृतिकी की सूचना दी थी, और विशेष रूप से इस रंगीन त्यौहार (होली) के लिए शुभकामनाएं दीं गयी थी। उस समय मैं थोड़ी जल्दबाज़ी में था इसलिए मैं ये दो चीज़े ही लिख पाया था, लेकिन अब मैं अपनी साईं धाम यात्रा और देवा के पवित्र दर्शन के कुछ और विवरण भेज रहा हूं।

यह मेरे शिर्डी दौरे का बहुत ही शानदार अनुभव था। मैं अपने साथ 17 लोगों को ले गया था, जिनमें मेरे बच्चे भी शामिल थे ताकि यह साईधाम की यात्रा और भी रोचक और यादगार बन जाए। 68 से लेकर 2.5 वर्ष के आयु के हर वर्ग के लोग इस सर्वशक्तिमान भगवान साईजी की प्रार्थना करने के लिए शामिल थे। हर चीज बहुत आसानी से होती गई, यहाँ तक की हमारे निवास में भी कोई समस्या नहीं आयी। देवा के आशीर्वाद के कारण की यह बहुत सुखद रहा। हमारे बाबा तो बहुत दयालु हैं।




मैंने कुल 127 प्रार्थनाओं का प्रिंट लिया था, जो निर्दिष्ट समय तक मेरे पास पहुंची थी। उनमें से कुछ मोबाइल के जरिए भी आए थे। लेकिन बहुत आश्चर्य की बात है कि कुछ प्रार्थनाएँ तंज़ानिया, कैलिफोर्निया, टोक्यो, एन.जे, काठमांडू, ब्राजील, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और हमारे इस महान भारत सहित दुनिया के कई स्थानों से प्रार्थनाएँ भेजी गईं थी।

हम 8 मार्च की दोपहर 3:40 बजे वहाँ पहुँचे। उसी दिन धुप आरती से पहले ही हमें प्रिय बाबा के दिव्य दर्शन मिले। वह दर्शन कितना दिव्या था। मैं और मेरे साथ आये कुछ सह यात्रियों ने 10:30 बजे की सेज आरती में भी हिस्सा लिया।

अगले दिन 9 मार्च, 2009 को, सुबह 7:30, हमे श्री साईंनाथ का बहुत अच्छा दर्शन मिला। वह बहुत ही दिल को छूने वाला दृश्य था। लेकिन उस समय भीड़ अधिक थी। इसलिए, मैं दुबारा कतार में लग गया ताकि मैं सभी साईं भक्तों की प्रार्थनाओं को बाबाजी के चरण कमलों में अर्पित कर सकू। वास्तव में, यह मेरी ही इच्छा थी की मैं उनके बार-बार दर्शन करता रहूँ। उनको एक बार देखने से कोई कैसे संतुष्ट हो सकता है?

मैंने पुजारीजी से उन प्रार्थनाओं की सूची जो एक छोटी पुस्तक के रूप में थी (जिसमे 127 प्रार्थनाएँ थी) उनको बाबा के चरण कमलो में रखने का अनुरोध किया और पुजारी जी ने यह बहुत ही पवित्र तरीके से किया। मैंने, बाबा से अपने सभी परिवार के सदस्यों, सभी भक्तों और पूरी दुनिया में शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। मुझे ऐसा करने में बहुत खुशी हुई। साई बाबा की कृपा हम सभी पर बानी रहे।

फिर, हमने मंदिर के आस-पास के सभी स्थानों और मंदिरों का दर्शन किया, सभी चीजों को काफी रुचि और गहराई से समझ रहे थे। होलीके दिन फिर से हमने उनके सुंदर रूप के पवित्र दर्शन किये, यह दर्शन हमें काफी लंबे समय तक मिला। हमारी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए मेरे पास कोई शब्द ही नहीं है! और इन सभी अनुभवों को शब्दों में कैसे समझाया जा सकता है ?

एक अंतिम प्रार्थना के साथ मैंने बाबा से विदा लिया की, “हे भगवान, मैं आपसे दूर नहीं जाना चाहता लेकिन फिर भी मैं आपसे फिर मिलने के इस लोभ के साथ जा रहा हूं। कृपया मुझे फिर से जल्द ही बुलाइये”और सचमुच मेरी आखों से आँसू बह रहे थे। मेरा दिल रो रहा था।

फिर देखिए कि मेरे जीवन में कैसे एक महान अनुभव हुआ।

जब मैं वापस आया, तब मैंने अपने चचेरी बहन से शिर्डी की यात्रा के बारे में विस्तृत बातचीत की। वह इस सप्ताह ही अपनी बेहेन और कुछ दोस्तों के साथ भारत आ रही थी और वह केवल मेरे ही साथ शिर्डी जाने की इच्छुक थी। मैंने सोचा कि मुझे उनकी सेवा करनी चाहिए, लेकिन उससे ज़्यादा यह तो मेरी आतंरिक इच्छा थी की मैं बार-बार बाबा के दर्शन कर सकू। वाह साईनाथजी आपकी लीला का कोई जवाब नहीं !!

इसलिए, निकट भविष्य में मैं शिरडी का दौरा फिर से कर सकता हूं, यदि बाबा चाहें तो। मैं आपको बताऊंगा कि कब आपकी प्रार्थनाओं को भेजना है ।

कृपया हेतलजी के मेल और ब्लॉग के संपर्क में रहें।

जय साईंनाथ …

श्री साईनाथ सभी को शांति प्रदान करें।

भूषण ढोलकिया

जय साईं राम

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Hetal Patil Rawat
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