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स्वप्न के द्वारा बाबा की कृपा प्राप्त हुई

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Sai Baba Blesses His Devotee In Dream से अनुवाद

यह बहुत ही ह्रदय स्पर्शी अनुभव था इसलिए यहाँ पोस्ट कर रहे हैं। भक्त ने अपना नाम नहीं लिखा है और जैसे मुझे यह भेजा गया था वैसा ही मैंने इसे प्रस्तुत किया है।

जय साईं राम,

मेरे प्रिय साईं मित्र, मुझे एक सुन्दर और लौकिक अनुभव हुआ और मैंने उसे अपने निजीजनों से साझा किया। लेकिन मैं उन सभी के साथ भी साझा करना चाहता हूँ जो कि साईं बाबा की कृपा को महसूस करना चाहते हैं।
1985 के दौरान मुझे अपने नौकरी में कुछ परेशानियाँ थीं और मैं काफी चिंतित था। एक दिन मुझे एक पोस्टकार्ड मिला जिसमें सलाह थी कि अपनी चिंता से मुक्त होना चाहते हो तो शिर्डी जाओ। मैंने अपनी पत्नी से सलाह ली और वह भी इस बात पर सहमत हुई कि हमें शिर्डी दर्शन के लिए जाना चाहिए। किन्तु वह बात मेरे दिमाग से उतर गयी और मैं उस पत्र को और उस अनजान भक्त की सलाह को भूल गया। किन्तु मेरी पत्नी ने मुझे शिर्डी यात्रा और उस प्रार्थना की याद दिलाई। काम और व्यस्तता के कारण मैं इसे कई बार टालता रहा। और 23 वर्षों तक मै रोजमर्रा की ज़रूरतों और मानव इच्छाओं में गुम रहा।

2007 में एक इन्शुरन्स कंपनी को पता चला कि मुझे रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रोल और रक्त में ट्राईग्लिसराइड्स है। उन्होंने मुझे ह्रदय समस्या सम्बन्धी टेस्ट करवाने को कहा। मैंने सारे टेस्ट करवाए, भगवान की कृपा से कोई भी बड़ी समस्या नहीं थी। लेकिन, इन्शुरन्स कंपनी द्वारा हृदयाघात का जो संदेह किया गया वह मेरे दिमाग में बना रहा और डॉक्टर की सलाह पर मैंने नियमित दवाएं चालू कर दी जिससे आगे समस्या न हो।

जैसे ही हम हॉस्पिटल से छूटे, मेरी पत्नी ने मुझे 1985 में मेरे द्वारा लिया गया वचन याद दिलाया और मुझे बोली कि मुझे और समय बर्बाद न कर शिर्डी जाना चाहिए। मैं सहमत था और मैंने एक ट्रेवल एजेंट को शिर्डी यात्रा का प्रबंध करने को कहा।

हम बैंगलोर से पुणे फ्लाइट से पहुंचे और शाम को 6 बजे कार से शिर्डी पहुँच गये। हमने शिर्डी साईं मंदिर के ठीक सामने होटल वुडलैंड्स में कमरा लिया। नहाने के बाद हम होटल के सामने सड़क पर आये। एक अपरिचित व्यक्ति सफ़ेद कपड़ों में हमारे पास आया और बोला कि मैं कोई एजेंट या गाइड नहीं हूँ लेकिन मैं साईं दर्शन में मदद कर सकता हूँ। और बिना समय बर्बाद किये हम उसके साथ मंदिर की ओर चल पड़े और प्रार्थना के लिए सामान ख़रीदा और जल्द दर्शन की ओर बढ़ गये। जो रास्ता उसने दिखाया हम उसी ओर चले गये और हमने बाबा का दर्शन बहुत अच्छे से किया और आशीर्वाद लिया। हमने उन्हें धन्यवाद दिया कि आखिर 23 साल बाद उन्होंने हमें अपने आशीर्वाद के लिए बुलाया। फिर हम मंदिर परिसर में घूमे, कुछ देर बैठे और चर्चा करते रहे कि किस तरह अलग अलग धर्म के लोग उनका आशीर्वाद लेने आते हैं और सभी की प्रार्थना भी यहाँ सुन ली जाती है। फिर हम होटल के कमरे में गए और रात को खाने के बाद मेरी पत्नी ने कहा कि सुबह काकड़ आरती पूजा में हम जायेंगे। चूँकि हम थके हुए थे फिर भी मैंने कहा की सुबह तुम को जगा दूंगा। फिर मैं सो गया।

सुबह के लगभग 5 बजे थे, उस समय मुझे जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव हुआ, बाबा का आशीर्वाद मिला जिसने मेरा जीवन बदल दिया। वह एक महान स्वप्न था। मैं शिर्डी की सड़कों पर चल रहा था। एक तेजस्वी बालक, खाकी पैंट खुली छाती में मेरे सामने खड़ा था और मुझे देख कर मुस्कुरा रहा था। उसकी मुस्कराहट इतनी अजीब थी कि मैं सोचने लगा कि यह क्यों हँस रहा है। उसने एक उंगली से मंदिर की ओर इशारा किया कि तुम्हारी दिशा वह है यह नहीं। मैंने कहा ठीक है। बिना किसी विचार के मैं उस ओर मुड़ गया और मंदिर की ओर चलने लगा। किन्तु इस बार वह बालक मुझे मंदिर के पास खड़ा मिला लोगों ने चारों ओर से उसे घेर लिया था और वह बालक हँस रहा था और उन पर गर्म पानी डाल रहा था। लोग अपने हाथ पीछे खींच रहे थे किन्तु वह गर्म पानी डालता ही रहा और अचानक वे लोग दर्द से कराहने लगे और हाथ खींचने लगे। ऐसा चल ही रहा था और मैं वह सब बादलों के बीच देख रहा था। तभी मुसकुराते हुए उसने मुझे देखा और उंगली से अपनी ओर आने का इशारा किया। मैं आगे बढ़ा और मैंने हाथ बढाया तो उसने गर्म पानी मेरे सर पर डाल दिया। और तभी मुझे अलौकिक अनुभव हुआ। एक ध्वनि "ओंकार" की सुनाई दी जैसे "ॐ" जोर से कहा गया हो। मेरा शरीर हल्का हो गया और वह भी उड़ रहा था। कोई दर्द नहीं और कोई अहसास नहीं, सब कुछ शांत, निशब्द, सब कुछ बहुत अच्छा, प्रसन्न था। यह एक अनोखा अनुभव था जिसे शब्द बयां नहीं कर सकते। वह बहुत ही अलग और "अलौकिक" अनुभव था। मुझे 3 बार "ओंकार" सुनाई दिया और बंद हो गया। मुझे ऐसा लगा कि मैं अब ठीक हो गया हु, कोई रोग नहीं, और सारे अंग अच्छे हैं। तभी निद्रा भंग हुई और मझे लगा की शिर्डी मंदिर की घंटियों की आवाज और मंत्र की आवाज आ रही है, काकड़ आरती चल रही थी। मैं बिस्तर पर बैठ गया और अभी भी उस कृपा को अनुभव कर रहा था। मैंने अपनी पत्नी को जगाया और कहा कि मैंने एक स्वप्न देखा, जो किसी भी अनुभव से ज्यादा मीठा था। इस पर वह बोली कि तुम्हारी प्रार्थना सुन ली गयी है। यही शिर्डी "स्थान की महिमा" का प्रभाव है।

फिर हम उसी रास्ते फ्लाइट से बैंगलोर वापस आ गये। जैसे ही हम घर पहुंचे, मुझे मेरे ऑफिस से एक बड़ा लिफाफा मिला। हिचकते हुए मैंने उसे खोला। मेरे आश्चर्य का ठिकाना न रहा, मेरे 23 वर्ष पुरानी समस्या सुलझ गई थी। मेरा वेतन बकाया, सारी वेतन वृद्धि और वेतन प्राप्त करने का आदेश महा लेखाकार द्वारा एक बड़ी राशि 5 लाख रुपये का भेजा गया था। यह साईं बाबा का ही चमत्कार था। मैं इसके लिए मैं पिछले 23 वर्षों से लड़ रहा था और ए.जी ऑफिस इन सालों में कई बार जाता रहा हूँ। यह साईं बाबा की ही कृपा थी। इसके बाद मैंने स्वयं को बदल लिया और अब मैं नियमित रूप से उनके पास जाता हूँ, जब भी वो मुझे बुलाते हैं उनकी कृपा से मैं पहुँच जाता हूँ। यह सारी बातें कुछ लोगों को संयोग लगे किन्तु मेरे लिए यह एक महान कृपा है। वे अपने भक्तों को कभी भी हारने नहीं देते।

जय साईं राम। [line] Translated and Narrated By Rinki Transliterated By Supriya


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