साईं बाबा की कृपा और चमत्कार की कहानियाँ: भाग 8

साईं बाबा की कृपा और चमत्कार की कहानियाँ

दिल ने कहा और साईं बाबा ने सुना

साईं भक्त अर्चना कहती है: प्रिय हेतल, आप जो सेवा कर रही हैं उसे बयां करने के लिए मेरे पास शब्द ही नहीं हैं| मुझे पता है कि आप ये शब्द दिन में 1000 से भी ज्यादा बार सुनी होंगी| लेकिन मेरा विश्वास कीजिये कि आप और आपका ब्लॉग मेरी नैया पार लगाने वाला था| मेरी अभिलाषा है कि एक बार आपसे मिलने का मौका मिले तो मैं आपके इस कार्य के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रशंसा कर सकूँ| मेरा एक अनुभव है जो मैं सभी पाठकों के साथ साझा करना चाहती हूँ| कृपया पूरा ई-मेल साझा न करें. केवल अनुभव साझा करें|

मैं कोई पक्की साईं भक्त नहीं थी लेकिन मैं धार्मिक प्रवृत्ति की थी| हाल ही में मुझे इच्छा हुई कि साईं बाबा के बारे में पढूं और नेट पर मैंने बोलना चालू किया| तब मुझे हेतल जी के ब्लॉग के बारे में मालूम हुआ और उसे पढने के बाद साईं सत्चरित्र के बारे में पता लगा| मैंने गुरुवार से इसे पढ़ना चालू किया| चूँकि मैंने पहले ऐसा कभी नहीं किया था इसलिए इसकी विधि के बारे में मुझे कुछ मालूम नहीं था| फिर भी मैंने तय किया की आगे बढ़ती हूँ और इसे करती हूँ| सिर्फ एक चीज़ मैंने तय किया कि किसी के बारे में बुरा नहीं बोलूंगी, झूठ नहीं बोलूंगी और किसी से लड़ाई नहीं करुँगी और जितना संभव होगा साईं को याद करुँगी| चूँकि मैंने कुछ पढ़ना तय नहीं किया था इसलिए मैं किसी पूजा के लिए तैयार नहीं थी और मेरे पास साईं सत्चरित्र भी नहीं था|

तो हर दिन सात दिनों तक ऑनलाइन साईं सत्चरित्र पढ़ा| 6 वें दिन मेरे पति से मेरी बहुत बड़ी लड़ाई हो गई और मैंने वह सब कहा जो मुझे नहीं कहना चाहिए था| बाद में मुझे बहुत बुरा लगा क्योंकि मैं शांति के लिए साईं सत्चरित्र पढ़ रही थी| पति के साथ इस लड़ाई के कारण मेरी मानसिक शांति भंग हो गई और मेरी पूजा भी| जैसे ही मैं बिस्तर पर गई मैं साईं बाबा से क्षमा मांगती रही कि मैंने जो कहा और किया उसके लिए मुझे माफ़ कर दें|

अगले दिन यानि गुरुवार को मैंने मंदिर जाने का सोचा| जब मैं जा रही थी तब मैंने अपने पति से कहा कि अब तक मैंने अपने पूरे जीवन में कभी भी इतनी श्रद्धा से कुछ नहीं किया था| लेकिन उनके कारण मैंने लड़ाई की और मेरी पूजा भी बर्बाद हो गई और मैंने साईं बाबा से प्रार्थना की कि मुझे माफ़ कर दे और उन्होंने मुझे इशारा किया कि वे मेरी पूजा से खुश हैं| ऐसा कहकर मैं मंदिर चली गई|

मैं नवरात्रि के दौरान सत्चरित्र पढ़ रही थी और जब मैं मंदिर गई तो सजावट देखी और मन किया कि आखरी दिन मैं अपने घर पर भी ऐसा ही करूँ, सत्संग वगैरह करूँ| लेकिन मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि आगे क्या होने वाला है| चूँकि उस दिन गुरुवार था, मंदिर भक्तों से भरा रहता था जो कि साईं बाबा की पूजा करने आते लेकिन उस दिन नवरात्रि होने से सब लोग देवी माँ की पूजा में व्यस्त थे और मंदिर में साईं बाबा की आरती के समय कोई भीड़ नहीं थी, लगभग 10 या 15 लोग होंगे| जब आरती आरम्भ हुई तो पुजारी थे लेकिन वे भी दूसरी पूजा में व्यस्त थे इसलिए उन्होंने आरती की थाली एक महिला को दी और कहा कि वे आरती करें| जब वे महिला आरती कर रही थीं, आधी आरती होने के बाद वे पीछे मुड़ीं और मुझे देखकर आरती की थाली मुझे देकर कहा कि बची आरती मैं करूँ| मुझे अपार हर्ष हुआ| ऐसा लगा कि शायद ऐसा ही मैं अपने घर पर करना चाहती थी और अब ऐसा हुआ कि अब मंदिर में इतने सारे लोगों के बीच करने का मौका मिला| मैंने आरती समाप्त की और प्रसाद वितरण के बाद मंदिर से ख़ुशी ख़ुशी चल पड़ी|

जब मैंने अपने पति सब बताया तो वो बोले कि अब मैं समझा कि साईं बाबा नाराज़ नहीं थे कि मैंने उनसे लड़ाई की और सारी बुरी बातें कहीं| हालाँकि मैं संतुष्ट थी मैंने कहा कि मैं खुश हूँ लेकिन सत्संग नहीं कर सकी जैसा चाहती थी, यह इच्छा अभी भी अधूरी है| वह दिन समाप्त हुआ और मैं सो गई|

अगले दिन मैं अभी पिछले दिन के जोश से उबरी नहीं थी कि मेरे पति का फ़ोन आया. उन्होंने कहा कि शायद साईं बाबा तुम्हारी सुन रहे हैं| मैंने पूछा ऐसा क्यों तो उन्होंने बताया कि उनके ऑफिस में एक सहकर्मी है और आज शाम को उसके घर पर साईं बाबा का सत्संग है और हमें बुलाया है| मैं बहुत खुश हुई लगा कहीं ये मजाक तो नहीं| साईं सत्चरित्र पढ़ते हुए जो भी मैंने चाह वह एक एक कर हो रहा था|

इस अनुभव से मैंने एक चीज़ सीखी कि जब आप कुछ पूरे मनोयोग से करते हैं तो वे अवश्य सुनते हैं| इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप दिन में 24 घंटे करते हैं, उनके लिए तो ह्रदय से केवल एक नमस्कार ही पर्याप्त है और वे सुन लेते हैं|

ॐ साईं राम

सादर

अर्चना

शिर्डी साईं बाबा ने जीवन संतुलित किया

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साईं भक्त लिपिका कहती है: प्रिय हेतलजी, ॐ साईं राम| सबसे पहले मैं आपको इतना अच्छा कार्य करने के लिए धन्यवाद कहना चाहती हूँ| मुझे बहुत खुशी और संतुष्टि मिलती है जब भी मैं साईं बाबा के चमत्कार और लीलाओं को पढ़ती हूँ| कृपया मेरा अनुभव पोस्ट करें जिसे मैं सभी साईं भक्तों के साथ साझा करना चाहती हूँ जिससे कि उन्हें पता चले कि हमारे साईं बाबा हमेशा अपने भक्तों की देखभाल करते हैं|

मैंने बाबा से वादा किया था कि मैं इस ब्लॉग के जरिये अपना अनुभव सभी से साझा करुँगी| थोड़े विलम्ब के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ बाबा| बाबा ने एक बार नहीं कई बार मेरी सहायता की है| मुझे मेरे सहपाठी से प्रेम था और हम विवाह करना चाहते थे लेकिन जीवन सदा गुलाबों की सेज नहीं होता. मेरे माता-पिता की ओर से कुछ आपत्तियां थीं| मुझे हमेशा ही विश्वास और धैर्य था जैसा कि बाबा कहते हैं| इसी बीच मुझे नौकरी मिल गई और मेरे ऑफिस के पास एक सुन्दर साईं मंदिर है इसलिए हर गुरुवार को मैं साईं मंदिर जाती हूँ बाबा के लिए लाल गुलाब लेकर और साईं सत्चरित्र पढ़ना भी शुरू किया| (हर अध्याय पढ़कर मुझे बहुत अच्छा लगा) जिसे मैंने आज ख़त्म किया| इस तरह मैं बाबा के और भी करीब हो गई और विश्वास हो गया कि वे अवश्य मेरी मदद करेंगे| साईं बाबा की कृपा और आशीर्वाद से हमारे माता-पिता एक दूसरे से मिले और शादी के लिए मान गए और मेरी शादी की तारीख 19 फरवरी 2010 तय हुई है| प्यारे बाबा आपका बहुत बहुत धन्यवाद् और मुझे पता है कि आप सर्वव्यापी हो और आप इस विशेष दिन ज़रूर आओगे और हम पर आशीष बरसाओगे| प्यारे बाबा एक बार फिर आपका बहुत बहुत धन्यवाद| बाबा एक और समस्या चल रही है लेकिन मुझे विश्वास है कि आप उसे भी सुलझा लेंगे|

बस इतना कहकर इसे समाप्त करुँगी की श्रद्धा और सबुरी रखें और साईं बाबा के चरणों में पूर्ण समर्पण करें| वे सदा अपने भक्तों की देखभाल करते हैं|

श्री साईं को प्रणाम, सर्व शांति

ओम श्री अनंतकोटी ब्रह्माण्ड नायक पूर्ण पर ब्रह्मा राजाधिराज योगिराज महा समर्थ श्री सच्चिदानंद सद्गुरु साईं नाथ महाराज की जय

साईं बाबा की कृपा से ठीक हुई

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साईं भक्त प्रियंका कहती है: ॐ साईं राम प्रिय हेतलजी, जय साईं रामजी, आपके इस अच्छे कार्य के लिए आपको बधाई! कृपया अपने ब्लॉग में मेरे बाबा के साथ इस अनुभव को साझा करें|

मैं अपने प्यारे साईं बाबा की एक आश्चर्यजनक लीला साझा करना चाहती हूँ| पिछले कुछ दिनों से मेरी तबियत ठीक नहीं थी| मेरा गला खराब हो गया था और मुझे सर्दी और खांसी हो गई थी जिसके कारण मुझे बहुत परेशानी हो रही थी. धीरे-धीरे मुझे बुखार भी हो गया| अब मैं बहुत घबरा गई| मैं पानी, चाय और सूप में बाबा की उदी मिलकर लेती रही|

मैं डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहती थी क्योंकि सामान्य बुखार को भी आजकल स्वाइन फ्लू मान लिया जाता|

रात में मैं सो नहीं पा रही थी| मैंने बाबा से प्रार्थना की, “बाबा कल सुबह तक मुझे ठीक कर देना. मैं आपके ब्लॉग में अपना अनुभव पोस्ट करुँगी| मुझे वापस ठीक कर दो|”

और चमत्कार हुआ जब मैं सुबह उठी तो बुखार गायब हो गया| मैं बहुत बेहतर महसूस कर रही थी| बाबा की कृपा से रातभर में ही मैं ठीक हो गई. सिरदर्द भी ख़त्म हो गया| मैं बहुत हलका और खुश महसूस कर रही थी| सिर्फ थोड़ी सी सर्दी और खांसी थी|

गुरुवार को जब मैं साईं बाबा मंदिर गई थी तब तबियत बहुत ख़राब थी| और कल जब रविवार को बाबा के मंदिर गई तो बहुत बेहतर थी और ख़ुशी ख़ुशी गई|

मेरा बुखार गायब करने और मुझे ठीक करने के लिए बाबा आपका बहुत बहुत धन्यवाद् कि आपने मुझे डॉक्टर के पास जाने से बचा लिया|

धन्यवाद् बाबा कि आपके कारण मैं यह अनुभव आपके ब्लॉग में पोस्ट कर पा रही हूँ| यदि मैं ठीक से और पूरा सही वर्णन न कर सकी तो बाबा मुझे माफ़ करना| यदि मैं कुछ लिखना भूल गई तो मुझे माफ़ करना|

बाबा अपनी कृपा और आशीर्वाद सदा बनाये रखना|

आपके चरण कमलों में समर्पण|

ॐ साईं राम

प्रियंका जिंदल

© Sai Teri LeelaMember of SaiYugNetwork.com

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Hetal Patil Rawat
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