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साईं भक्त राखी को "नाम जाप" के लिए पहला संकेत

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The First Indication For Naam Jaap To Sai Devotee Rakhi से अनुवाद

इस श्रुंखला में पहले पोस्ट थे कल के पोस्ट से हमने यह जाना की कैसे भगवान साईं बाबा हमें सामूहिक तरीके से "नाम जाप" उद्यम शुरू करने के लिए आशीर्वाद दे रहे हैं। 2018 बाबा की महासमाधि का शताब्दी वर्ष है और हम सभी ने हमेशा देखा हैं कि वह अपने भक्तों के कल्याण के लिए कितने उत्तरदायी रहते है। वह अपने सभी बच्चों को (इस धरती पर प्रत्येक जीवित वस्तु) को उनकी सेवा करने के लिए लिए आशीर्वाद देते है। हम कहते हैं कि उनके आशिषो के प्रति अपनी सेवा के रूप में उनका आभार प्रकट कर रहे है । श्री साईं सत्चरित्र के एक अध्याय में लिखा था के किस प्रकार , भगवान साईं बाबा ने श्रीमती तर्खड से "राजा राम राजा राम" का जप करने के लिए कहा जब वह बाबा के पैर दबा रही थीं और बदले में बाबा भी उनका हाथ दबा रहे थे। इस पारस्परिक भक्त और भगवन की सेवा को तकनीकी रूप से "शक्ति-पाट" कहते है किन्तु बाबा ने हमेशा नाम-स्मरण को उत्तम साधना कहा है । आइए अब हम देखते है की नाम जाप के लिए साईं भक्त राखी को पहला संकेत कैसे मिला। [line] हेतल जी,

जो आप साई की अद्भुत सेवा कर रही है उसके लिए बोहुत धन्यवाद । आपके ब्लॉग ने मुझे कठिन समय में बहुत आशा और समर्थन दिया है। आप हमारे शामा की तरह हैं जिन्होंने बाबा की सेवा 24/7 की थी।

अब मैं अपनी कहानी की ओर बढती हु...

वर्ष 2017 की शुरुआत में मैं कोलंबस में साईं बाबा के मंदिर गयी थी। पर भजन के समय मैं वहा कभी नहीं गयी और उस दिन बाबा के आशीर्वाद से मुझे भजन सुनने का मौका मिला मैं भजनों का पूरी तरह से आनंद ले रही थी और मैंने बाबा को इसके लिए धन्यवाद भी किया। मैं उसी प्रसन्न और शांतिपूर्ण वातावरण में रहना चाहती थी । उस पल में मैं बाबा और उनके प्रेम से मंत्रमुग्ध हो गयी थी, और तभी मैंने एक आवाज़ सुनी ‘जो मुझे एक वर्ष के लिए भजन करने के लिए कह रहे थे’। मैं बहुत हैरान थी और यह सुनिश्चित नहीं कर पा रही थी की यह मेरा स्वयं का विचार था या बाबा वास्तव में मुझसे बात कर रहे थे। मुझे ऐसा भी लगा कि क्या मैं बाबा से इस बारे में पूछ रही थी, जब मैंने इस पूरी घटना के बारे में अच्छे सोचा तो मुझे केवल एक ही उत्तर मिला जो था भजन करना ।

समय के साथ साथ यह विचार मेरे मन में गहराता गया और मैंने साईं बाबा से पूछा कि आप मुझसे भजन कब करवाना चाहते हैं? मुझे कभी-कभी लगता था जैसे इस बारे में मैं कुछ ज्यादा ही सोच रही हु फिर भी यह विचार मेरे मन से कभी नहीं गया, यह सिर्फ गहरा और गहरा होता गया। मै इसके बारे में बोहुत चिंतित रहती थी और बाबा से मैंने कहा, "बाबा यह वर्ष इतनी तेजी से गुजर रहा है, मेरे पास तो कोई योजना भी नहीं है कृपया मुझे बताएं कि मुझे किस महीने से भजन शुरू करना चाहिए"। यह मेरे लिए एक ऐसा विचार बन गया था जिसके बारे में मैं हमेशा सोचती रहती।

अप्रैल महीने के किसी एक दिन मैंने उनसे पूछा कि यदि यह मेरा विचार नहीं है और यह आपका है, तो आपको ही मुझे समय सीमा बताना होगा। उसी शाम मेरी कुछ दोस्तों से मुलाकात हुई जो बाबा की भक्त थी और उनमें से कोई एक दूसरे से कहने लगी की अक्टूबर 2017 से शिर्डी में बाबा की महासामधि के 100 वें वर्ष का उत्सव मनाया जाएगा । मुझे इस बात की बिलकुल भी जानकारी नहीं थी कि शिर्डी में ऐसा कुछ होनेवाला है । फिर मैंने जो आवाज़ सुनी थी वो और ये जो अक्टूबर में शिर्डी में उत्सव होगा इन दोनों बातों को जोड़ने पर मुझे समझ आया की बाबा ने भजन करने के समय की पुष्टि की है, जो यह है की भजन को अक्टूबर में शुरू करना चाहिए", मैं अपने बाबा की इस प्यारी लीला पर चकित थी और इस प्रकार उनका उत्तर पा कर मुझे उनके साथ एक जुडाव जैसा महसूस हुआ।

मैंने सोचा ओह मेरे प्यारे बाबा आपने अपनी लीला द्वारा आखिर मुझे जवाब दे ही दिया। मेरे बाबा ने मुझे भजन करने का समय बताया, जो की उनका समाधिस्त होने का 100 वां वर्ष है, जहां समारोह केवल शिर्डी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया भर में होगा । मुझे बहुत राहत मिली और प्रसन्नता भी हुई क्योंकि मुझे लगा कि जैसे बाबा ने मुझे इस जश्न में शामिल होने के लिए कहा हो।

फिर से मेरे मस्तिष्क में कई प्रश्न उठने लगे की मैं कैसे करू ? भजन एक साल के लिए कैसे होगा ? मुझे क्या करना चाहिए? यही मेरे मस्तिष्क में दिन-रात घुमने लगा। फिर मैंने तो सब अपने साईं देवा पर छोड़ दिया और उनसे कहा की मेरा मार्गदर्शन करे। मानवीय प्रकृति के कारन मैं बार-बार यही सोच रही थी और बाबा से पूछ रही थी के, क्या यह मेरा स्वयं का विचार है या फिर आप सच में मेरा मार्गदर्शन कर रहे हो? एक दिन सुबह साईं बाबा से बात करते हुए मैंने उन से पूछा कि भजन करवाने की यदि आपकी इच्छा है और यह मेरा स्वयं का विचार नहीं है तो आपको ही मुझे एक बहुत स्पष्ट संकेत देना होगा। मैं उनसे यही बार बार पूछती रही क्यूंकि मेरे पास तो कोई योजना नहीं थी, लेकिन कुछ समय बाद मैं बाबा के साथ अपनी इस बातचीत के बारे में भूल गयी थी।

उसी दिन मेरे एक दोस्त ने मुझे यह मेसेज किया की उन्होंने मेरे मेल बॉक्स में शिर्डी का प्रसाद रखा है। मैंने सोचा की मैं कितनी भाग्यशाली हूं की मेलबॉक्स में मुझे प्रसाद प्राप्त हुआ। मुझे खुशी थी कि बाबा मेरे घर आए । फिर मुझे याद आया की मैंने बाबा को स्पष्ट संकेत देने के लिए कहा था और उन्होंने मुझे इस प्रसाद के रूप में संकेत दिया है । यह सोच कर ही मेरे रोंगटे खड़े हो रहे थे और यकीन नहीं कर पा रही थी कि मैंने बाबा से संकेत देने के लिए कहा था और मैं स्वयं इस बारे में भूल गयी थी, पर बाबा नहीं भूले। इसप्रकार भजन करने की एक और पुष्टि मिल गयी और वो भी सीधे शिर्डी से। यह अविश्वसनीय था। मैं तो यह सोच रही थी की देवा आप चीजों की व्यवस्था कैसे करते हैं, जैसे ही विचार हमारे मस्तिष्क में आता है, आप इसे भौतिक रूप से सत्य कर देते हैं। यह एक स्पष्ट संकेत था कि बाबा ने भजन करने के लिए मुझे निर्देशित किया था।

अब मैं तारीख के बारे में सोचने लगी कि मुझे किस तारीख को भजन करना चाहिए। 15 अक्टूबर वह तारीख है जब बाबा ने महासमधी ली थी और मैंने भी 15 अक्टूबर को अपने घर पर पहला भजन करने का फैसला किया। चीजें चलती ही गयी और मैं बाबा से पूछती रही की मैं पूरे एक साल के लिए क्या और कैसे करू क्योंकि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था ? इस बीच जब मैं लंबे समय से हेतल जी के ब्लॉग जो "साईं बाबा को लेकर भक्तो के अनुभव (devotees experiences with sai baba)" उसे पढ़ती थी, और एक दिन मैंने महापारायण के पोस्ट को देखा और तुरंत ही फॉर्म भर दिया, वैसे तो गर्मीयों के समय पर मैं काफी व्यस्त रहती हु किन्तु मैंने ज्यादा कुछ सोचा नहीं। मैं बस महापारायण का हिस्सा बनना चाहती थी। ।

तीन हफ्ते बाद मैं बाबा के मंदिर में गयी और मैंने पांडित जी को बताया कि कैसे बाबा मुझे भजन करने के लिए मार्गदर्शन कर रहे हैं और पहला भजन मैं 15 अक्टूबर को रखने का सोच रही हु क्योंकि उसी दिन बाबा समाधिस्त हुए थे। पंडित जी ने तुरंत ही मुझे कहा कि आपको 30 सितंबर जो दशेहरा है उस दिन शुरू करना चाहिए, उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को इकट्ठा करके उसी दिन शुरू करो।

पंडितजी की बातों से मैं और भी असमंजस में पड़ गयी और बाबा से पूछने लगी की मैं अपने पहले भजन को 30 सितम्बर को दशेहरे के दिन करू या फिर 15 अक्टूबर को करू जिसकी मैंने योजना बनायीं थी। मुझे यकीन था कि मेरे मार्गदर्शक मेरे बाबा मुझे रास्ता दिखायेंगे। बाबा के लिए कुछ करने का यह विचार इतना दृढ़ था कि जाने-अनजाने मैं उसी बात से घिरे रहती और उसी के बारे में हमेशा सोचती रहती।

4 सितंबर सोमवार की सुबह को मेरे बच्चे घर पर ही थे और मैंने भी उस दिन छुट्टी ली थी, मैं ऐसे ही 30 सितंबर के बारे में सोचते हुए बाबा से कह रही थी की कृपया आप कोई योजना बनाइये , मुझे नहीं पता कि मैं क्या कर रही हूं|मेरे पास एक विचार है लेकिन कुछ भी स्पष्ट नहीं है और मैं उन बिन्दुओ को जोड़ नहीं पा रही हु।

एक अस्चार्यजनक बात है जिसे मैं बाँटना चाहती हूं और इसका निष्कर्ष हेतल जी के शब्द से है कि "साईं की घटनाएं कभी भी संयोग नहीं होती हैं"(साईं बाबा जो भी करते है वो कभी भी संयोग नहीं होता, उसके पीछे कोई कारण अवश्य होता है)। काफी लंबे समय से मैं 108 इस अंक के संपर्क में आ रही थी । शुरुआत में मुझे लगा अरे वाह , यह एक शुभ संख्या है और ये कभी मेरे फोन में समय के रूप में हो, या राजमार्ग (highway) के अंक, निकास(exit), टाइमर, चेक नंबर, या के घर का पते के रूप में , यह संख्या बार-बार मेरे संपर्क में आ रहा था और मैं सोच रही थी की क्या मैं कुछ भूल रही हूँ ? यह संख्या बार-बार मेरे सामने क्यों आ रहा है ? ऐसा क्या है जो मैं नहीं समझ पा रही हूँ ? कुछ देर के लिए मैं सोच में तो पड़ गयी थी फिर बादमे मैंने इसपर विचार करना छोड़ दिया। मैंने उस विचार को इसीलिए छोड़ा क्यूंकि मैं सारी कड़ियों को जोड़ नहीं पा रही थी|

हम अपनी बात पर फिर लौटते है। 4 सितंबर वह दिन था जब कनिका जी (जो महापारायण ग्रुप की सदस्य है) उन्होंने मुझसे संपर्क किया और पारायण के बारे में बात की। मैं बोहुत उत्साहित थी कि मुझे पारायण करने का मौका मिला| हमने 48 लोगों का ग्रुप बनाने के बारे में बात की और मैंने उनसे कहा की ग्रुप बनाने में मैं भी मदद करना चाहती हु। अब मैं पारायण का हिस्सा हु यह सोचकर मैं बहुत उत्साहित थी| बाद में जब मैंने अपनी सारी कड़ियों को जोड़ा तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए और मैं बाबा के चमत्कारो के बारे में सोचकर और उन्हें देखकर अभिभूत(overwhelmed) हो गयी ; क्यूंकि ;

1) महापारायण 30 सितंबर से शुरू हुआ (जो पंडित जी द्वारा दी गई तारीख)
2) इसकी भी वही एक वर्ष की समय सीमा है जो कि बाबा ने मुझे 30 सितंबर से अक्टूबर 2018 तक करने के लिए कहा था।
3) 108 अंक बाबा की ओर से मुझे संकेत था महापारायण में हिस्सा लेने के लिए।

फिर मैं अमरीका चली गयी और वहा मैंने अपना पारायण करना शुरू किया, मैं हमेशा से चाहती थी की मैं सभी साईं भक्तों को इकट्ठा करके एक दिन का पारायण करू (जिसमे हम साईं सत्चरित्र के सारे 51 अध्याय एक ही दिन में पढ़ते है) पर कई सालों तक मुझे मौका नहीं मिला, किन्तु जैसे हम जानते है की एक सच्ची और शुद्ध इच्छा हमेशा बाबा के दरबार में स्वीकार की जाती है। उसीप्रकार मेरी भी इच्छा पूरी हुई और मुझे एक पारायण ग्रुप बनाने का अवसर मिला।

भजन करवाना भी मेरी काफी पुरानी इच्छा थी जिसे मैं पहले नहीं कर पाई थी पर इसबार मुझे वह मौका भी मिला और 15 अक्टूबर को मैंने अपने घर पर भजन रखा था और उसका वीडियो क्लिप भी है जहां बाबा नाचते हुए फूलों के रूप में भजन का आनंद लेते हुए नज़र आ रहे हैं।

मैं और क्या कहू , मैं अपने साईं की लीलाओ द्वारा गद-गद हो गयी हु और मैंने बाबा का प्यार हमेशा महसूस किया। इस लंबे पोस्ट के लिए मुझे खेद है, किन्तु याहा आप सभी से अपने अनुभवों को बाँट कर मुझे बोहुत ख़ुशी हो रही है और मुझे विश्वास है कि बाबा ने भी महापारायण का ही संकेत दिया था मुझे।

ॐ साईं राम

अगला पोस्ट : भगवान बाबा द्वारा साईं भक्त राखी को एक और संकेत

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Translated and Narrated By Rinki Transliterated By Supriya

© Sai Teri Leela - Member of SaiYugNetwork.com

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