Wednesday, August 22, 2018

भूषण जी (भाग 2) - बाबा ने परीक्षा में पास करवाया

साईं भक्त भूषण जी का एक और ह्रदयस्पर्शी अनुभव।
हेतल जी ,
ॐ साईं राम...

मैं एक और चमत्कारिक अनुभव लाया हूँ, कृपया सभी साईं भक्तों के लिए अपने ब्लॉग पर पोस्ट करें...हमारे बाबा इतनी सारी लीलायें करते हैं और उसमें से कई तो हमारी समझ की क्षमता के परे होती हैं । उचित होगा कि हम अपने अहंकार को त्याग कर उनकी शरण में जाएँ –

पहला - अनुभव

मैं आईओसीएल में कार्य करता हूँ (जो कि भारत की सर्वोत्तम कंपनी है और विश्व की 500 भाग्यशाली कंपनियों में से एक है ) जो केवल सद्गुरु श्री साईं नाथ की कृपा और आशीर्वाद के कारण ही है। हालाँकि मैं आर्थिक और शैक्षणिक रूप से संतुष्ट हूँ, फिर भी मैं इग्नो (IGNOU) से कंप्यूटर और सॉफ्टवेर क्षेत्र में डिग्री कोर्स कर रहा था ।

यह उस समय की बात है जब मेरी दिनचर्या बहुत ज्यादा व्यस्त थी। प्लांट में शटडाउन था (आप सभी की जानकारी के लिए बता दू - प्लांट की एसी स्थिति में उत्पादन बंद हो जाता है और रखरखाव कार्य किया जाता है क्योंकि लगातार उत्पादन करते रहना संभव नहीं होता है) रखरखाव कार्य जारी था और मैं एक दिन में 16 घंटे कार्य कर रहा था !!! मैं बहुत ज्यादा तनाव में था क्योंकि आने वाली परीक्षा के लिए कुछ भी तैयारी नहीं कर पा रहा था। मेरी परीक्षा और तैयारी के लिए सिर्फ 4-5 दिन बचे थे। लेकिन मैं कुछ भी नहीं कर पा रहा था। मैं ऑफिस के काम और अन्य जिम्मेदारी में सामंजस्य नहीं बिठा पा रहा था.... एक स्थिति में मैंने सोचा “क्या मैं परीक्षा में बैठ भी पाऊंगा या नहीं ?” यदि बैठ भी गया तो “मै बिना किसी तैयारी के, करूँगा क्या??” इसके आलावा, उन दिनों में छुट्टी मांगना भी बहुत कठिन था !! तो यह एक और समस्या थी मेरे लिए। क्याकरूँ? क्या ना करूँ? और आखिर, मैंने तय किया कि परीक्षा नहीं दूंगा और केवल काम पर ध्यान दूंगा। पर होता वही है जो उन्हें मंज़ूर होता है ....मनुष्य योजना बनाता है और साईं उन्हें बदल देते है... उन्होंने कुछ और ही सोच रखा था !!!

मुट्ठी में से रेत की तरह समय फिसलता गया... मैं सिर्फ कुछ ही अध्याय पढ़कर तैयार कर सका वो भी अपने काम के तनाव और चिंता के बीच रहकर !!! वो दिन, मुझे आज भी याद है, 11 जून 2008, आखिर आ गया। मैं सुबह की पाली में था और 5.30 बजे ऑफिस जाता था। मैं 4.45 बजे सुबह उठ गया, और सबसे पहले बाबा का चेहरा देखा, यह पिछले 10 सालों से मेरी आदत है... दर्शन के बाद, मैं काम के लिए तैयार हुआ... मैं घर से बाहर आया और बाइक देखी, पता चला वह तो पंक्चर है !!! मैंने एक और दू-पहिया वाहन निकाला, लेकिन 30-40 बार किक मारने के बाद भी चालू नहीं हुआ!! मुझे देर हो रही थी.. अब मुझे इतनी सुबह कौन ले जायेगा??? वाह आप ही जाने क्या क्या करते हो साईं नाथ!!! मुझे अपनी इस हालत और बुरी किस्मत पर बहुत क्रोध आ रहा था !! लेकिन वो ज़रूर मेरी कमजोरी और बेवकूफी पर मुस्कुरा रहे होंगे !!! हमारे साथ यही समस्या है... हमें ईश्वर पर ज्यादा भरोसा, आस्था और प्रबल विश्वास नहीं रखते है !!! जब हम उस दिव्य आश्रय के नीचे हैं तो हमें चिंता क्योंहोनी चाहिए???फिर भी हम चिंता करते हैं .... मुसीबत में कभी मत कहो की “ हे भगवन मुझे बहुत बड़ी समस्या है” बल्कि ऐसा कहो की ऐ समस्या, मेरे भगवान बहुत बड़े हैं और सब कुछ ठीक हो जायेगा”

मैंने तय किया कि 8 बजे कंपनी की बस में काम पर जाऊँगा। अब मेरा तनाव कई गुना बढ़ गया था... क्योंकि अब मैं देर से ऑफिस पहुँचता और अपने बॉस को मुझे देरी का कारण बताना पड़ेगा!!! मैं वापस घर के अंदर गया, आराम से बैठा और स्थिति पर विचार करने लगा। तब मैंने सोचा थोड़ा सा पढ़ लूँ, लेकिन मैं पढाई पर ध्यान केन्द्रित नहीं कर सका!! सुबह 8 बजे ऑफिस पहुंचा और अपने कामों में बहुत ज्यादा व्यस्त हो गया । मेरी परीक्षा का समय 2 बजे से शाम 5 बजे तक था, और मुझे भरोसा हो चला था कि मैं परीक्षा में नहीं बैठ पाऊंगा!!! अब देखिये कैसे जीवन में स्थितियां बदलती हैं... बल्कि मैं ये कहूँगा की बाबा कैसे जीवन की स्थिति बदलते हैं!!!

हर आने वाली घटना की पूर्व सूचना हमे मिलती है!!! लेकिन कई बार हम उसे समझ नहीं पाते... अचानक, मेरे वरिष्ठ प्रबंधक आये (सामान्यतः वे सबसे ज्यादा बात नहीं करते हैं और बहुत ही प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी हैं) उन्होंने मुझसे पूछा: “भूषण, तुम कंप्यूटर में कुछ आगे पढाई कर रहे हो? क्या प्रगति है??”
मैंने धीरे से जवाब दिया (उस समय तो उन्होंने मेरी दुखती रग पर हाथ रख दिया था): “ हाँ सर..”
उन्होंने मेरी उत्साहहीन और धीमी आवाज़ को पकड़ लिया और पूछा “ क्या बात है, तुम ठीक तो हो?”
मैंने उन्हें सारी बातें संक्षिप्त में कह सुनाई... उन्होंने शांति से सब कुछ सुना। कुछ क्षणों के बाद, गहरी सांस लेकर आदेश देते हुए बोले
“तुम घर जाओ और परीक्षा में बैठो”। मै एक क्षण भी ना गंवाते हुए घर की ओर भगा.. उस समय 11.45 बजे थे जब मैं घर पहुंचा। मेरे पास पढाई के लिए सिर्फ 1 घंटा था!!! भगवान साईं नाथ की प्रार्थना करते हुए, मैं 1.30 बजे घर से निकला। परीक्षा हॉल मैंने बड़े ही डर, तनाव और कम आत्मविश्वास के साथ प्रवेश किया ... कई बार, ईश्वर हमें हमारी हद तक विवश करते हैं । वे हमारे धैर्य की परीक्षा लेते हैं क्योंकि उन्हें हम पर अधिक विश्वास होता है जितना हमें स्वयं पर नहीं होता! आखिर ठीक 2 बजे पेपर मिला... मैं साईं बाबा से अच्छे भाग्य के लिए प्रार्थना कर रहा था.. किन्तु मैं उन चीजों को कैसे मांग सकता हूँ, जिनके मैं लायक भी नहीं?? तो सिर्फ बेहतरी के लिए माँगा... मैं भीतर तक कम्पित हो उठा , क्योंकि बहुत ही कठिन पेपर था। कोई तैयारी नहीं और इतना कठिन पेपर... कल्पना कीजिये!!!

फिर भी मैं, जितना कर सकता था, उतना बेहतर मैंने किया। मैं 100 अंकों में से 42 कर पाया !!! पास होने के लिए 50% चाहिए । किन्तु मैंने तो पास होने लायक भी नहीं किया था... मैं अपने प्रयासों और किये गए उत्तरों के आधार पर अपने नकारात्मक परिणाम के लिए तैयार था। 75 दिन के बाद...लगभग 2/5 (ढाई महीने) बाद परिणाम आया, और वह गुरुवार का दिन था। उन दिन सुबह मैंने साईट खोली और घबराहट के साथ अपना नंबर खोजने लगा!!! और क्या??? मेरा परिणाम था 58 अंक और मैं पास हो गया ... वाह... कैसे??? !!!!! यह मेरे लिए एक चमत्कार था... सचमुच!!! तो, मैं विश्वास से कह सकता हूँ कि यह मेरे बाबा ने ही किया था ... मैंने परिणाम की जांच कराई (उत्तर पुस्तिका की पुनःजांच) और एक माह बाद बोहत रोचक और अद्भुत उत्तर मिला... उन्होंने उत्तर दिया कि आपके पेपर की जाँच सही पाई गई। आपने 67 अंकों के उत्तर लिखे थे जिनमें से 58 अंक आपने प्राप्त किये हैं...!!! अब प्रश्न उठता है कि किसने 67 अंकों के उत्तर लिखे जबकि मैंने तो केवल 42 अंकों के उत्तर लिखे थे? आखिर किसने 25 अंक के उत्तर लिखे?? मैं तो मानसिक रूप से अनुत्तीर्ण होने के लिए तैयार था, लेकिन किसने मुझे इतने अच्छे अंक प्रदान किये?? यह कैसे हुआ? ऐसा किसने किया?? प्रश्न कई हैं लेकिन इन सभी प्रश्नों का उत्तर एक ही है। सबका मालिक एक- सच्चा कर्ता!!!

हमारी समस्या और समाधान के बीच की दूरी उतनी ही है, जितनी हमारे घुटनों और जमींन के बीच की दूरी है ! जो भी साईं नाथ के समक्ष अपने घुटने टेकता है वह भी समस्या का सामना कर सकता है ... साईं ही सर्व समर्थ हैं ...
तो ...साईं के चरणों में लाखों प्रणाम.... साक्षात् दंडवत प्रणाम... सद्गुरु साईं नाथ “साईं ने मुझे वो नहीं दिया जो मैंने उनसे माँगा ।उन्होंने मुझे वो सबकुछ दिया जिसकी मुझे आवश्यकता थी।” सब पर साईं नाथ का आशीर्वाद बना रहे ...
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे साईं हरे साईं साईं साईं हरे हरे !!!

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इस कहानी का ऑडियो सुनें


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Translated and Narrated By Rinki Transliterated By Supriya


© Sai Teri Leela - Member of SaiYugNetwork.com

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