Saturday, February 1, 2020

साईं भक्त सुमंत: बाबा के बेशुमार आशीर्वाद

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साईं भक्त सुमंत कहते है: प्रिय हेतल जी, मेरे जीवन की इस साईं लीला को आप अपने ब्लॉग में प्रकाशित करें और कृपया निम्नलिखित लीला को संपादित (एडिट) करें जहाँ भी आवश्यकता हो। आपकी इस सेवा पर हमें बहुत गर्व है, साईं बाबा आप पर अपना आशीर्वाद हमेशा बनायें रखे।

मैं आपको साईं बाबा का चमत्कार बताना चाहता हूँ जो मैंने और मेरी पत्नी ने अनुभव किया है। दरअसल हमारी लव मैरिज हुई है। हमारी शादी वर्ष 2007 में हुई थी, उस समय मेरी उम्र 38 वर्ष की थी और मेरी पत्नी 25 वर्ष की थी। मेरी पत्नी के परिवार वालो ने बहुत विरोध किया था उनके माता-पिता मेरी उम्र के कारण हमारी शादी के बिलकुल खिलाफ थे। लेकिन मुझे साईं बाबा पर पूरा विश्वास था।

आखिरकार, बाबा के आशीर्वाद से हमने 20th फरवरी 2007 को शादी कर ली। उसके बाद उनके परिवार वाले सभी सहमत हो गए और हमारी शादी के रिसेप्शन की व्यवस्था की। हमारे स्वागत के समय मैंने साईं बाबा के चित्र को लगा हुआ पाया। बाबा को हम दोनों का स्वागत करते हुए देखकर मुझे बहुत खुशी हुई और यह बाबा ही थे जिन्होंने मेरी पत्नी के परिवार वालो के मन को बदला है और अब हम सभी साईं बाबा के आशीर्वाद से बहुत खुश हैं।

एक साल बाद कुछ समस्या हुई क्योंकि अब तक मेरी पत्नी ने गर्भ धारण नहीं किया था और लोगों ने बच्चे के बारे में पूछना शुरू कर दिया था। मेरी पत्नी को भी इस बारे में चिंता होने लगी और मैं उसे कहता रहा की साईं बाबा पर विश्वास रखे कीथे। नवंबर के महीने में हमारी शादी की दूसरी वर्षगांठ के दिन ही हमें शिरडी जाने का विचार आया| हमने टिकट पाने की कोशिश की लेकिन टिकट उपलब्ध नहीं थे, कुछ और कोशिश करने के बाद आखिरकार हमें शिरडी का टिकट मिला और मैं अपने जन्मदिन पर वहाँ था जो 28 फरवरी को पड़ता है। साईं बाबा का भक्त होने के नाते मेरे लिए यह एक सपना सच होने जैसा था क्योंकि 8 से 10 वर्षों के बाद मुझे बाबा ने शिरडी में बुलाया और वो भी मेरे जन्मदिन पर बुलाकर मुझे आशीर्वाद दिया। सच में मैं बहुत खुश था।

पहली बार होने के नाते मैं सोच रहा था कि साईं बाबा ने हमें शिरडी आने के लिए कोई संकेत क्यों नहीं दिया। आमतौर पर मैं हर शुक्रवार को चेन्नई के मायलापुर साईं बाबा मंदिर जाता था। एक शुक्रवार को मैं सोच रहा था कि साईं बाबा हमें शिरडी बुलाएं और शिरडी आने का कोई इशारा दें। जब मैं उनसे प्रार्थना कर ही रहा था, उसी समय मेरी पत्नी मेरे पास आकर कहने लगी कि उसे एक भक्त ने साईं बाबा की तस्वीर दी है जिसमे अंग्रेजी में लिखा था, (“My Devotee Come to Me”) "मेरे भक्त मेरे पास आओ" बाबा की फोटो और इन शब्दों को देखकर मैं बहुत ही ज्यादा खुश हुआ। और मैं सोच रहा था कि देखो बाबा अपने भक्तों की कैसे चिंता करते हैं। एक साईं भक्त की मदद से हमने द्वारकामाई के पास शिरडी में एक कमरा बुक किया। हम 27 फरवरी की शाम को 3 बजे शिरडी पहुंचे और स्नान कर के शाम 4 बजे तक हम मंदिर गए और बाबा के अद्भुत दर्शन किए। फिर से हम अगले दिन काकड़ आरती के लिए जाना चाहते थे इसलिए हम सुबह 1 बजे स्नान करके 2 बजे तक मंदिर पहुँच गए। हमने देखा कि पहले से ही भक्त कतार में खड़े थे। लगभग 4.30 बजे उन्होंने हमें मंदिर में जाने की अनुमति दी और हमने बहुत अच्छे से दर्शन किये । हम बाहर आकर फिर से बाबा के दर्शन के लिए गए। इस बार कतार में चलते समय मैं पूरी श्रद्धा से बाबा से प्रार्थना कर रहा था कि हमे बच्चा प्रदान करे।

एक आश्चर्य की बात हुई की जब मैं बाबा की समाधि के पास पहुचा तो सुरक्षाकर्मी ने मुझे उनके बगल में खड़े होने के लिए कहा और कहा की जितनी देर तक चाहिए उतना  बाबा से आप प्रार्थना कर लो और जब मैं बाबा से प्रार्थना कर रहा था तो अचानक उन्होंने कुछ प्रसाद एक नारियल और फूल लेकर मुझे दिया। दरअसल मैं हैरान था और मैं सोच रहा था कि बाबा किस तरह मेरा ख्याल रख रहे हैं और मुझे मेरे जन्मदिन पर आशीर्वाद दे रहे हैं। मैं पांच मिनट से भी ज़्यादा बाबा की समाधि के पास खड़ा था। मैं बाहर नहीं आ पा रहा था लेकिन सभी भक्तों को भी दर्शन मिलना चाहिए यह सोचकर मैं बाहर आ गया। उस समय मेरी पत्नी बाहर बैठी थी, उसने मुझे बताया कि उसके भी बहुत अच्छे दर्शन हुए और उसने बाबा के मुकुट को भी छुआ था, जो पुजारी जी के हाथ में था । उस दिन हमने बाबा के तीन बार दर्शन किये जो बहुत ही अद्भुत थे। अंततः हम 2 मार्च को चेन्नई पहुंचे।

शिरडी जाने से पहले मैं और मेरी पत्नी हर गुरुवार को साईं व्रत पूजा करते थे। हमने 5 फरवरी 2009 को साई व्रत शुरू किया और 9 अप्रैल 2009 को पूरा किया। मैं आपको और एक बात बताना चाहता हूँ की शादी के एक साल बाद जब हमे बच्चा नहीं हुआ तो हम डॉक्टर से जांच करवाने अस्पताल गए थे। उस समय सभी परीक्षण ठीक थे लेकिन प्रजनन संख्या (fertility count) में समस्या थी। यह सुनकर मैं बहुत ही उदास और चिंतित था और बाबा से प्रार्थना कर रहा था। डॉक्टर ने मुझे दो महीने की विटामिन की गोलियां दीं थी जिससे मैं रोज रात में खाता था ।

जब से मुझे इस समस्या के बारे में पता चला था तब से मैंने बाबा की उदी को पानी में मिलाकर रोज लेना शुरू कर दिया। दो महीनेकी गोलियाँ जो दी गई थी वो ख़तम होने वाली थीं और साईं व्रत पूजा भी पूरी हो गई। मुझे बाबा पर अटूट विश्वास था कि निश्चित रूप से वह हमें बच्चा प्रदान कर के आशीर्वाद देंगे। गुरुवार को साईं व्रत पूजा के बाद, मैं हमेशा की तरह शुक्रवार को बाबा के मंदिर गया| इस बार मैं बाबा से प्रार्थना कर रहा था की मैं और मेरी पत्नी बाबा से अच्छी खबर की उम्मीद कर रहे है ।

एक भक्त साईं बाबा की तस्वीर का वितरण कर रहे थे, मैं भी उसके पास गया और एक फोटो मेरे लिए और दूसरा मेरी पत्नी के लिए मैंने लिए और जो शब्द उस फोटो में लिखे थे उसे देखकर मैं हैरान रह गया उस में लिखा था (why fear when I am here) "मैं यहाँ हूँ तो फिर फ़िक्र क्यों"। मैं बहुत खुश हुआ। मुझे पता था कि बाबा ने हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर दिया है। इसके बाद सोमवार को मेरी पत्नी ने कुछ परीक्षण किए और शाम को परिणाम आया| "जी हाँ बाबा ने हमारी प्रार्थना सुन ली क्योंकि परिणाम सकारात्मक आया"। सच में, दो साल बाद मेरी पत्नी ने गर्भ धारण किया और शुक्रवार 24 अप्रैल को हम डॉक्टर से मिलने जानेवाले थे। देखिये, दरअसल मैं बाबा की उदी के साथ डॉक्टर द्वारा दी गई गोली दो महीने तक ले रहा था और बाबा ने अन्य कोई उपचार या परीक्षण के बिना ही हमें आशीर्वाद दिया है।

साईं बाबा पर विश्वास और धैर्य रखें। 100% आपकी प्रार्थनाओं का उत्तर बाबा अवश्य देंगे। बाबा के प्रति पूर्ण आत्म समर्पण करें। बाकी सब बाबा संभाल लेंगे।

जय साईं राम
S.Sumanth


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