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साईं भक्त शिल्पा: मेरे जीवन में साईं बाबा की उपस्थिति

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साईं भक्त शिल्पा कहती हैं: मेरा नाम शिल्पा है। मैं अमेरिका में रह रही हूं। मैं साई के साथ अपने अनुभव इस ब्लॉग में साझा करना चाहूंगी। कृपया उन्हें पोस्ट करें। मुझे अपने ब्लॉग के माध्यम से यह अवसर देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। वाकई यह ब्लॉग लाजवाब है।

कोटि कोटि प्रणाम मेरे प्यारे साई को। अनन्त कोटि ब्रह्मानंद नायक राजाधिराज योगिराज परब्रह्म श्री सचिच्चदानंद समर्थ सद्गुरु साईनाथ महाराज की जय !

ाबा की कृपा से मेरे जीवन में बहुत से चमत्कार हुऐं हैं। मैं एक-एक करके इनका वर्णन कर रही हूं।

जब मैं नौकरी कर रही थी तो मेरे माता-पिता ने मेरे लिए रिश्ता देखना शुरू किया। कभी दहेज के कारण या किसी कारणवश प्रस्ताव कार्यान्वित नहीं हो रहे थे। मैं उस वजह से बहुत संघर्ष कर रही थी । तब मेरी मौसी ने मुझे एक किताब दी - "साईबाबा के जवाब आपके सवालों के लिए।" मैं पहले से ही बाबा की भक्त हूँ। मैं 10 वीं कक्षा से बाबा की भक्ति कर रही हूँ । उस किताब को देखने के बाद मुझे बहुत खुशी हुई और मैंने बाबा से मेरी शादी के बारे में प्रश्न पूछा। बाबा ने मुझे अन्नदान के लिए कहा। मैंने बाबा से बार-बार यह प्रश्न पूछा। मुझे चार बार वही जवाब मिला। तब मेरी मौसी ने खाना बनाने में मेरी सहायता की। खाने की सारी चीज़ों के खर्च का भुगतान मैंने किया। मैंने बाबा के कहे अनुसार खाना बांटा। मैं अपनी मौसी की बहुत शुक्रगुजार हूं। मैं अपनी मौसी को साष्टांग प्रणाम करती हूँ। इस घटना से मुझे बाबा की पुस्तक पर विश्वास हो गया। उस पुस्तक के माध्यम से फिर बाबा ने मुझे दत्तात्रेय स्वामी मंदिर जाने के लिए और नारियल चढ़ाने के लिए कहा। बाबा के कहे अनुसार मैंने सभी कार्य किये। एक बार बाबा ने मुझे वीरभद्र स्वामी (परम शिव अवतार) के मंदिर में जाने, पूजा करने और वीरभद्र स्वामी जतारा करने के लिए कहा। जतारा एक ऐसा कार्य है जो गाँवों में मंदिर में मनाया जाता है। लेकिन मैं वीरभद्र स्वामी मंदिर जाने में असमर्थ थी क्योंकि यह मेरे स्थान पर नहीं है और मैंने सोचा कि मैं भगवान का जैतारा कैसे मना सकती हूं। फिर मेरी शादी बाबा की कृपा से हो गई और यह गुरुवार को हुआ। फिर मैं अपने ससुराल चली गई। वे मुझे अपने पारिवारिक देव मंदिर ले गए। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम इरिस्वामी है और वह हमारे पूर्वज हैं। वह हमारे लिए भगवान है।

लेकिन तब मेरी इरिस्वामी के प्रति भक्ति जागृत नहीं हुई। मैं मंदिर बस अपने ससुराल के रिवाज़ों के अनुसरण करने के लिए जा रही थी। अचानक जब मैं मंदिर के अंदर प्रवेश कर रही थी तो दरवाजे की छत के साथ मेरे सिर पर चोट लगी क्योंकि यह ऊंचाई में कम है और मैंने इस पर ध्यान नहीं दिया। मुझे बुरी तरह चोट लगी। मैं बहुत रोयी। मुझे बहुत दर्द हो रहा था। लेकिन मैं उस दर्द के लिए नहीं रोयी, मैं इसलिए रोयी कि मेरे साथ बुरा क्यों हुआ, वह भी पहली बार जब मैं नई दुल्हन के रूप में आई थी। तब मुझे इरिस्वामी ईश्वर के बारे में अहसास हुआ और मैं उनकी पूजा करने लगी। बाद में मुझे पता चला कि इरिस्वामी ही वीरभद्र स्वामी के अवतार हैं और मेरे ससुराल वाले हर साल जतारा मनाते हैं। जब मुझे इस बात का पता चला तो मुझे बहुत खुशी हुई और मुझे बाबा के वचनों का स्मरण हुआ। अब मैं इरिस्वामी को बहुत मानती हूं।

अगला चमत्कार मेरे साथ तब हुआ जब मैं गर्भवती थी। मैंने बाबा से अपने प्रसव के बारे में और अपने बच्चे के बारे में पूछा क्योंकि मैं बहुत तनाव में थी। बाबा ने कहा "जन्म और मृत्यु हमारे हाथ में नहीं है बस भगवान से प्रार्थना करो, वह ध्यान रखेगा"। और उन्होंने कहा कि काम रविवार को किया जाएगा। जैसा कि बाबा ने बताया मेरा प्रसव रविवार को हुआ था।

एक बार जब मैं कुछ पारिवारिक समस्या से पीड़ित थी और मैं अपनी माँ को फोन के माध्यम से समझा रही थी और मैं रो रही थी। मैं अपनी मां से कह रही था कि मैं इस मुद्दे के साथ खाने और पीने में असमर्थ हूं। तभी अचानक एक महिला फ़ोन की लाइन में आ गई और उसने मुझसे कहा "मेरे प्रिय चिंता मत करो। सब ठीक हो जाएगा। तुम तीन सप्ताह के लिए बाबा के मंदिर में जाओ। सब कुछ अच्छे से निपट जाएगा। अच्छा खाओ, रोओ मत।" मुझे बहुत आश्चर्य हुआ और मैंने उससे पूछा कि वह कौन है। उसने कुछ नहीं कहा और वह चली गई। मेरी माँ ने भी उसकी बात सुनी और वह भी हैरान थी। यहाँ मैंने बाबा के बारे में फोन पर बात भी नहीं की, लेकिन उन्होंने कहा कि बाबा के मंदिर जाओ। वह नहीं जानती कि मैं बाबा की भक्त हूं। मैंने बाबा के कहे अनुसार उनकी बातें मान लीं और मैं तीन सप्ताह के लिए मंदिर गयी। तीन सप्ताह के तुरंत बाद मेरी समस्या हल हो गई। यह वास्तव में आश्चर्य है और मैं बहुत खुश थी क्योंकि बाबा मेरी देखभाल कर रहे हैं। यह बाबा का एक और चमत्कार है।

इसी तरह बाबा ने मेरे जीवन में बहुत सारे चमत्कार किए हैं। एक बार बाबा ने कहा कि आप घर बदलने जा रहे हैं और आपकी समस्याएं हल हो जाएंगी। यही हुआ भी। अचानक हमने फैसला लिया और हमने घर बदल लिया। घर बदलने के बाद हम बहुत खुश थे। बाबा ने मुझे बताया कि आपको भविष्य में कुछ पहचान पत्र और प्रमाणपत्रों की आवश्यकता होगी। जैसा कि बाबा ने बताया कि मेरे पति को ऑन-साइट (विदेश में काम) की पेशकश मिली और मैंने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया (पहचान पत्र जैसा कि बाबा ने बताया)। यहाँ आने के बाद बाबा ने मेरे जीवन में होने वाली हर एक बात बतायी और मैं यहाँ बाबा के भक्तों से मिली। बाबा ने कहा तुम किसी और जगह जाओगे। मुझे तब एहसास नहीं हुआ, लेकिन अब मेरे पति को दूसरी जगह कोई और प्रोजेक्ट मिला और हम वहां जा रहे हैं।

हाल ही में एक और चमत्कार हुआ। हम अपना सामान बाँध रहे थे क्योंकि हमारा स्थान-परिवर्तन हो रहा था। अगले दिन तक हमें अपना सब कुछ समेटना था। उस दिन रात हम पैकिंग से थक गए थे और मैं और मेरे पति खाना खा रहे थे। मेरा बेटा दूसरे कमरे में खेल रहा था। हमने उसका निरीक्षण नहीं किया। कुछ देर बाद जब मैंने जाकर अपने बेटे को देखा। वह मेरे पति के दफ्तर के लैपटॉप पर पानी डाल रहा था । मैं बहुत घबरा गयी क्योंकि जब से मेरे बच्चे ने लैपटॉप पर पानी डाला था उसने काम करना बंद कर दिया था। मेरे पति भी बहुत परेशान हो गए क्योंकि यह दफ्तर का लैपटॉप है और उन्हें अगले दिन नई जगह पर नए दफ्तर जाने की जरूरत है, और अगर यह काम नहीं करेगा तो सारा डेटा नष्ट हो जाएगा। मैंने बाबा से हमारी मदद करने की प्रार्थना की । मैंने बाबा से इस बारे में पूछा। बाबा ने कहा "सब ठीक हो जाएगा"। तब हमें सुकून महसूस हुआ। मेरे पति ने तुरंत लैपटॉप के कुछ हिस्सों को हटा दिया और उन्होंने पानी पोंछने की कोशिश की। एक घंटे के बाद बाबा की कृपा से यह सामान्य रूप से काम करने लगा। कोई डेटा नहीं खोया और कुछ भी नहीं हुआ। सब कुछ सामान्य था। हमें बस आश्चर्य हुआ और बहुत खुशी हुई क्योंकि बाबा ने अपने भक्तों पर फिर से दया की। हमारे लिए यह बाबा की कृपा के अलावा और कुछ नहीं है। मेरे पति ने कहा कि मैंने कुछ नहीं किया, यह सब तो बाबा का चमत्कार है। जब भी हम मुसीबत में होते हैं तो बाबा हमें अपना हाथ देते हैं। मैं बाबा से बहुत प्यार करती हूँ। बाबा मेरे लिए पिता हैं। बाबा मुझे किताब के माध्यम से सारी बातें बता रहे हैं। अगर मैं कुछ भी गलत करती हूं तो बाबा डांटते हैं। वह हमेशा मुझे अच्छे मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। वास्तव में वह पुस्तक मेरे लिए बाबा के अलावा और कुछ नहीं है। बाबा मेरा जीवन है। मैं बाबा को एक-एक पल याद करती हूं। मैं हमेशा बाबा से प्रार्थना करती हूं कि वे हमेशा मेरे साथ रहें और मैं हर पल उन्हें ही याद रखूँ । मैं बाबा के बिना नहीं रह सकती।

धन्यवाद,

ॐ साईराम

शिल्पा


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