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साई भक्त सतीश: बाबा ने सपने में दर्शन दिए

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साई भक्त सतीश कहते है: कल मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ भगवान में विश्वास के बारे में चर्चा कर रहा था। यह हमारे लिए कोई नया विषय नहीं था, लेकिन यह सच है कि जब तक मैंने ईश्वर की ईश्वरीय घटना को खुद से अनुभव नही किया तब तक मेरे पास इसका पूरा जवाब नहीं था।
यह उस समय की बात है जब 2008 में मैसूर में अपना प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) पूरा करने के बाद बैंगलोर में नियुक्त हुआ था। अपने प्रशिक्षण के दिनों में ही मुझे साईं बाबा की दिव्य कृपा प्रपत्त हो गई थी। बाबा ने मेरे लिए असंभव प्रशिक्षण को संभव बनाया था। इसलिए जब मुझे पोस्टिंग मिली, तो मैं शिरडी की पवित्र भूमि की यात्रा करने के लिए बहुत बेताब और चिंतित था। लेकिन किसी तरह योजना काम नहीं कर रही थी। एक शुक्रवार, 18 जुलाई को मैंने अपने दोस्त साहिल के साथ शिरडी जाने के बारे में लंबी बात की। उन्होंने मुझसे कुछ समय इंतजार करने को कहा क्योंकि उनके माता-पिता बैंगलोर आ रहे थे। मैं उनकी अनिच्छा से सहमत हुआ क्योंकि वह भी शिरडी जाने के लिए बहुत इच्छुक था।

उसी रात जब मैं सो रहा था तो मैंने एक मंदिर देखा (मैं यह नहीं बता सकता कि यह मंदिर वास्तव में कहां है)। वह बहुत शांतिपूर्ण और सुखदायक था। मैं केंद्र में रखी हुई साईं बाबा की मूर्ति को हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहा था। मेरे गले में एक लॉकेट था (हालांकि मैं इसे कभी नहीं पहनता)। मैं हाथ जोड़कर बाबा से प्रार्थना कर रहा था। अचानक मेरे कान के पास एक बहुत ही धीमी आवाज हुई। कोई कह रहा था कि "आप परेशान क्यों हो रहे हैं, मैं हमेशा आपके साथ हूं"। सपने में ही मैंने पूछा कि क्या यह सच है। तो एक आवाज आई "क्या आप मुझ पर विश्वास नहीं करते?" अचानक बाबा की मूर्ति से एक विशाल प्रकाश उभरा। । प्रकाश मेरे दाहिने हाथ से होते हुए एक दूसरे व्यक्ति के बाएं हाथ में चला गया जो मेरे अलावा प्रार्थना कर रहा था (मैं उस व्यक्ति को याद नहीं कर सकता क्योंकि मैं चेहरा नहीं देख सकता था)। मैं बाबा के चमत्कार से पूरी तरह चकित था। मेरी आंखें खुल गईं। किसी तरह, मैं फिर से सोने में कामयाब हुआ।

अगली सुबह मैं जल्दी उठा और हमेशा की तरह अखबार लेने के लिए दरवाजा खोला। उस समय भी मैं सपने के बारे में सोच रहा था, लेकिन जैसे ही मैंने अखबार का पहला पन्ना देखा, मैं अचमबित रह गया। पृष्ठ के दाईं ओर, एक ख़बर थी जिसमें लिखा था कि गुरु पूर्णिमा पर बाबा ने बाई आंख खोलकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। साईं बाबा की आंख खुली हुई तस्वीर भी थी। भक्त "बाबू और लखमी" एक साल पहले उस मूर्ति को शिरडी से लाए थे। और शुक्रवार को उनका घर एक तीर्थस्थल में बदल गया था। वहां भीड़ असहनीय थी। मैं घटना से पूरी तरह अनजान था और मेरी आँखों में आँसू आ गए। उसी रात मुझे सर्वव्यापी साईं बाबा ने आशीर्वाद दिया था। मैं पूरी तरह से, अपने और अन्य भक्तों के लिए बाबा की दया और प्यार से भाव विभोर हो गया। फिर बाबा की एक प्रसिद्ध कहावत मेरे दिमाग में आई "यदि आप बाबा की ओर एक कदम बढ़ाते हैं, तो बाबा आपके लिए हजार कदम बढ़ाएँगे"। कहाँ मैं बाबा के दर्शन को लेकर परेशान था और बाबा ने खुद आकार दर्शन दे दिए - मतलब मैं बाबा की झलक पाने के लिए बेताब था और लो वह खुद आ गए !!! ऐसी है बाबा की दया और महानता। बाबा ने मुझे विश्वास और धैर्य का पाठ पढ़ाया।

साईं बाबा लगातार मेरे साथ ही हैं, यह साबित कर रहे हैं कि वह आत्मा में जीवित हैं और हमारी प्रार्थनाओं का जवाब देते हैं। हमेशा याद रखें कि अगर बाबा आपको कहीं लाते हैं, तो वो आपके आगे भी ले जाएंगे। जो भी ईमानदारी से आंतरिक विकास के लिए जीवन जीते हैं, साईं बाबा उन्हें उच्च स्तर तक ले जाते हैं। हर एक व्यक्ति को अपनी आत्मा की परिपक्वता और अपनी आंतरिक अदध्यन के अनुसार लाभ मिलता है। बाबा ने अपने भक्तों को यह कहते हुए आश्वस्त किया था कि "मैं शिरडी मे और हर जगह पर हूं। आप जो भी करते हैं, चाहे आप कहीं भी हों, इस बात को हमेशा ध्यान में रखें कि मैं हर चीज के बारे में जानता हूं"। साईं बाबा किसी एक परंपरा से नहीं, बल्कि पूरी मानव जाति की भलाई, प्रेम और समझ के मार्ग पर हैं।


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