Tuesday, August 28, 2018

बाबा का मेडिकल साइंस में चमत्कार

Shirdi Sai Baba Miracles Leela Blessings Sai Nav Guruwar Vrat Miralces in Hindi | http://hindiblog.saiyugnetwork.com
Experience Of A Lady Devotee Of Shirdi Sai Baba से अनुवाद

साईं भक्त परिवार का एक ह्रदयस्पर्शी और आश्चर्यजनक अनुभव दिया जा रहा है । जब बाबा सशरीर थे, वे शिर्डी में कई भक्तों की बीमारी ठीक किया करते थे। यह अभी भी जारी है। आज भी हमें कई एसी घटनाएँ सुनने मिलती हैं, जो कि हमें उन घटनाओं की याद दिला देती हैं, जो हम साईं सत्चरित्र में पढ़ते हैं। उसी शृंखला को जोड़ता एक अनुभव नीचे दिया जा रहा है। केवल साईं ही महान चिकित्सक हैं, इस प्रकरण में यही सिद्ध होता है। यह घटना चिकित्सा विज्ञान में चमत्कार सिद्ध हुई है।

मेरी बेटी दमा (अस्थमा) से पीड़ित है। 2006 में उसे तपेदिक (टी बी) हो गई जो कि एक साल तक उपचार करने बाद ठीक हो गई। फिर वह नौकरी पर दूसरे शहर चली गई, परन्तु प्रदूषण के कारण वह फिर से बीमार हो गई। जब उसकी जांच कराई तो पता चला कि उसको गंभीर निमोनिया हो गया है।

दुर्भाग्य से उसी जगह हुआ जहाँ पहले तपेदिक हुआ था, इसलिए उस जगह की कोशिकाएं मृत हो है और गुर्दे भी प्रभावित हो गये और उनमें कफ़ भर गया था। डॉक्टर ने कहा कि थोड़ सी भी ज्यादा देरी होती तो ज़िन्दगी बचाना मुश्किल हो जाता। हमने जब सुना तो हमारी साँस ही रुक गई और हमने बाबा से प्रार्थना की और उसकी ज़िन्दगी की भीख मांगी। हालाँकि उसको तुरंत हॉस्पिटल में भर्ती किया गया और उपचार किया गया लेकिन हमसे उसकी तकलीफ देखी नही जा रही थी।

हर दिन मैं साईं मंदिर जाती, बाबा के चरणों से एक फूल लाती और उसके तकिये के नीचे रख देती। मै मन में लगातार साईं नाम जाप करती रहती। हम हर दिन उसे उदी भी लगत थे। एक रात मैंने और मेरे पति ने प्रार्थना की कि एक बार वह ठीक हो जाये हम आपके दर्शन के लिए शिर्डी आयेंगे। मैंने साईं सत्चरित्र पठन का प्रण भी लिया। धीरे-धीरे 2 दिन बाद उसकी हालत में सुधर हुआ। बुखार उतर गया और वह बेहतर महसूस करने लगी। उसे घर भेज दिया गया। हालाँकि उसकी तबियत बेहतर हो गयी थी, लेकिन वह पूरी तरह ठीक नहीं हुई थी। उसके गुर्दे का एक हिस्सा हमेशा के लिए क्षतिग्रस्त हो गया था। इससे वह बहुत ज्यादा निराश हो गई। हम उसे समझाते रहते कि बाबा में पूरी आस्था और विश्वास रखो, वे ही तुम्हें इस विपदा से बचायेंगे ।

15 दिन बाद हम शिर्डी गये। हमने साई बाबा दर्शन किये और प्रार्थना की और मेरी बेटी ने प्रतिज्ञा ली कि बाबा मुझे इस बीमारी से पूरा ठीक कर दो, मैं आपके दर्शन को हर माह के पहले गुरुवार को 9 माह तक आऊँगी। दर्शन करते समय पुजारी ने कहा- द्वारकामाई में धूनी के पास के मटके का थोड़ा पानी ले जाओ और हर दिन उसे थोडा-थोड़ा पियो। तुम्हें अच्छा लगेगा। (बाबा पहले इसी मटके से पानी पिया करते थे)। हम मस्जिद गये। वहां बहुत लोग नहीं थे। तभी एक व्यक्ति आये और मेरी बेटी से बोले, इस मटके से थोडा पानी घर ले जाओ और हर दिन पियो। तुम्हें अच्छा लगेगा । और वे अचानक कहाँ गायब हो गये, पता ही नहीं चला। हमने एक बोतल उस पानी से भर ली और बाबा के दर्शन कर मुंबई वापस लौट आये।

मेरी बेटी ने 7-8 दिनों तक बाबा को याद करते हुए उस पानी को पिया। आज भी वह उदी लगाती है और पानी के साथ पीती है। डॉक्टर के परामर्श से दवाइयाँ और कसरत जारी रखीं। इतने सब के बावजूद उसकी हालत में बहुत सुधार नहीं था। वह मानसिक रूप से हताश हो गई और उसने सभी उम्मीदें छोड़ दीं। एक दिन उसने बाबा से प्रार्थना की "बाबा मैं खुद को आपको सौंप रही हूँ। अब आप मुझे ठीक करते हो या नहीं, आप का निर्णय है। मैं आपके आदेश को ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकार करुँगी।" बाद में दिसम्बर 2007 में बाबा उसके सपने में आये और बोले-"तुम 6 माह में धीरे-धीरे ठीक हो जाओगी "।

उसके बाद उसमें परिवर्तन आने लगा। वह खुश रहने लगी। वह लगातार बाबा की प्रार्थना करती और नाम जाप करती। चिकित्सा रिपोर्ट में पता चला कि जित भाग में निमोनिया हुआ था वह स्थाई तौर पर ख़राब हो गया और श्वसनी काम नहीं कर रही थी। एक ऑपरेशन की सलाह दी गई वरना उस जगह फिर से संक्रमण हो सकता था। हम दुखी थे लेकिन साईं पर परम विश्वास था। हमने प्रार्थना जारी रखी और उदी मिश्रित जल देना भी जारी रखा। हम चमत्कार की प्रतीक्षा कर रहे थे। छ: माह बाद एक एक्स-रे लिया गया। और हम सभी अचंभित रह गये कि वह एकदम सामान्य था। सुप्त पड़ गई श्वसनी खुल गई थी । ख़राब हो चुके गुर्दे पूरी तरह काम कर रहे थे। सब कुछ एकदम सामान्य था। हर एक व्यक्ति अचंभित था। डॉक्टर स्वयं भी साईं भक्त थे, उन्हें भी अपनी आँखों पर विश्वास नही हो रहा था। उन्होंने कहा यह चिकित्सा विज्ञान में एक चमत्कार है। साईं की महान कृपा है ।

बाबा ने जैसा वचन दिया था ठीक 6 माह में मेरी बेटी को स्वस्थ कर दिया और हमारा विश्वास कायम रखते हुए एक गंभीर विपदा से मेरी बेटी की रक्षा की।
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Translated and Narrated By Rinki Transliterated By Supriya


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