Shirdi Sai The Saviour

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शिर्डी जाते समय स्वयं साईं बाबा मिले

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Sai Baba Of Shirdi Meets On The Way To Shirdi से अनुवाद


साईं भक्त सतीश जी हाल ही में शिर्डी गए थे, वे कई भक्तो की कागज़ में लिखी हुई प्रार्थनाए लेके गए थे जो सद्गुरु साईं नाथ के चरण कमलो में रखी गयी। कल ही वह शिर्डी से लौटे और उन्होंने कुछ शब्द उनके अनुभव के बारे में लिखे हैं और उनकी इच्छा है की इसे सभी साईं भक्तो के साथ बाटा जाए। इस पूरी घटना को पढ़ कर मैं तो मंद पड़ गयी।

ॐ साईं नाथ

कृपया निम्नलिखित जानकारी देखिये, मेरी शिर्डी यात्रा की और साईनाथ के साथ हुए मेरे अनुभव की।

मैं शिर्डी जाने के लिए बुधवार को घर से निकला और रात 8 बजे की मेरी ट्रेन थी। मैं ट्रेन पर चढ़ कर अपने बर्थ पर बैठ गया। मैं बोहुत ही चिंतित था क्योंकि यह पहली बार था कि मैं अकेले इतनी दूर ट्रेन से सफ़र करुगा। मैं कई बार शिर्डी गया था, पर इस बार मैं अकेला था। मैं वास्तव में परेशान था लेकिन बाबा पर विश्वास भी था कि सबकुछ ठीक होगा और मुझे पता था कि बाबा हमेशा मेरे साथ है मेरी रक्षा करने के लिए। सुबह जब मैं उठा तो मैंने कुछ साईं भक्तो को बाबा के भजन गाते हुए सुना। वह सभी बाबा की लीलाओ को भी गाते जा रहे थे उसे सुनना मुझे अच्छा अच्छा लग रहा था । करीब सुबह के 10:30 बजे मैं एक साईं भक्त के पास गया और कहा कि हम दोपहर 12:00 बजे आरती गायेंगे, जिसके लिए वह भी मान गए। दोपहर के ठीक 12:00 बजे हमने बाबा की तस्वीर को अपने सामने रखा और आरती शुरू की। माहौल बोहुत ही अच्छा हो गया था क्योंकि हम सभी एक ही स्वर में बाबा की आरती गा रहे थे। आरती के पूरा होने के बाद हम सभी ने बाबा का आशीर्वाद लिया और मैं अपने बर्थ में वापस आ गया।

कुछ समय बाद, मैंने एक बूढ़े आदमी को अपने कोच की ओर आते हुए देखा और वह भिक्षा मांग रहा था। कोई भी उस बूढ़े व्यक्ति को कुछ भी नहीं दे रहा था फिर वह शांतिपूर्वक मेरी तरफ आ रहा था। जब वह मेरे पास आया तो मैंने उसे एक नयी धोती दी जो मेरे पास थी। मैंने एक साई भक्त की सलाह से ट्रेन में चढ़ने से पहले इसे खरीदा था।

जब मैंने उस बूढ़े व्यक्ति को धोती दी तो वह बहुत खुश हो गया और मेरे सिर पर उन्होंने अपना हाथ रखकर आशीर्वाद देते हुए कहा कि बाबा आपको आशीर्वाद देगा बेटा"। मुझे आशीर्वाद देने के बाद उन्होंने मेरे निकट अपनी जोहली (बैग) को रखा और कुछ ढूंड रहे थे । कुछ समय खोजने के बाद, उन्होंने अपने बैग से 10-15 एकदम नई साईं बाबा की तस्वीरे निकाली।

हर कोई जो वहाँ प्रस्तुत थे, वे सभी उस बूढ़े व्यक्ति के पास उन नए फोटो को देख कर अस्चर्या में आ गए क्योंकि वह बहुत गरीब दिख रहा था और किसी ने भी ऐसी नई तस्वीर उनके बैग में होने की उम्मीद नहीं की थी।

उन्होंने सभी तस्वीरो को बहार निकला और काफी छान-बीन के बाद उन्होंने मुझे साईं बाबा की 2 तस्वीर दी। एक तस्वीर में साई बाबा चावल के बड़े हांड़ी में अपना हाथ डाले हुए थे। उन्होंने मुझसे कहा "देखें कि साईं बाबा अपने भक्तों के लिए भोजन कैसे तैयार कर रहे हैं, क्या ये कोई कर सकता है" .....

जब अन्य सभी लोगों ने देखा कि वह बूढ़ा व्यक्ति मुझे फोटो दे रहे है , तो बाकि सभी फोटो मांगने लगे। बूढ़ा व्यक्ति उन सभी पर बहुत गुस्सा होकर कहने लगे- "देखो उसने मुझे यह धोती दी है, तो मेरा भी कर्त्तव्य है की मैं भी उसे कुछ दू, इसलिए मैंने उसे फोटो दी," जो लोग मुझे देते हैं, मैं उन्हें देता हूं"। मैं उस बूढ़े व्यक्ति के अंदर साईं बाबा को महसूस कर रहा था (सई भक्त सतीश ने उन तस्वीरो का फोटो निकल कर भेजा है जो साई बाबा द्वारा उपहार में उन्हें दिए गए थे और मैंने उसे यहाँ अपलोड किया है। तस्वीर साफ़ न दिखने के कारन मुझे खेद है, लेकिन हम भाग्यशाली हैं कि कम से कम हम सभी ये देख सकते है की साई बाबा ने उनको क्या भेंट किया।)

उन्होंने उनसे ये भी कहा कहा "आप दूर के स्थानों से आ रहे हैं और इतना खर्च कर रहे हैं लेकिन फिर भी इसका कोई फायदा नहीं है अगर आप गरीबों को कुछ नहीं देते हैं।

यह बोलने के बाद वह ख़ुशी ख़ुशी चले गए।

उस बूढ़े व्यक्ति के जाने के बाद मेरे सामनेवाले व्यक्ति ने बताया कि वह सचमुच आश्चर्यचकित था क्योंकि उस बूढ़े व्यक्ति बहुत गरीब दिख रहा था और उस गंदे बैग में साईं बाबा की इतनी नई तस्वीरे होने की उम्मीद नहीं थी।

मैं बोहुत खुश था की बाबा ने मुझे फिर से आशीर्वाद दिया।

मैं दोपहर के 2 बजे कोपरगाँव पोहचा और वहाँ से मैंने ऑटो लिया और 3 बजे तक शिर्डी पोहचा। मैंने किराये पर एक रूम लिया और फ्रेश होने के बाद बाबा के दर्शन के लिय मैं मंदिर की ओर निकल पड़ा। मैं भक्तो के प्रार्थनाओ के प्रिंट को लेकर लगभग शाम के 4:20 को मंदिर के गेट पर पोहचा। मुझे बोहत ही अच्छा दर्शन हुए और जब मैं भक्तो की प्रार्थनाओ की पर्ची समाधी के सामने ले गया तो पंडित ने उसे नहीं लिया और वापस कर दिया। मैं बोहुत निराश था क्योंकि इसमें सभी प्रार्थनाएं थीं और मैंने सभी साईं भक्तों से वादा किया था कि उनकी प्रार्थनाए बाबा की समाधि के सामने होंगी। मैंने उम्मीद नहीं खोई और मैंने बाबा के दर्शन के लिए फिर से मुख्य द्वार में प्रवेश किया। तब लगभग 5 बजे के आसपास बज रहे थे।

मैंने आरती शुरू होने तक इंतजार किया। आरती बोहत ही अच्छी हुई । साईं नाथ के सामने आरती करना बोहुत ही अच्छा था सभी साईं भक्तों ने एक स्वर में आरती को गाया। उसमें भाग लेना बोहुत ही आत्मा तृप्ति वाला था। आरती के बाद मैं आगे बढ़कर साईं बाबा की समाधि तक पोहचा।

मैंने सुना था कि बाबा के मंदिर में जो लोग गुरुवार शाम को धूप बत्ती जलाते हैं, उनकी सारी इच्छाए पूरी होती हैं। मैं बाहर से धूप खरीदकर लाना भूल गया था और वापस जाकर लाने की स्थिति में भी नहीं था तो मैं बस सोच रहा था कि क्या करू और फिर.... मैंने मेरे सामने दो धूप बत्ती को देखा। मैं उन्हें देखकर बोहुत हैरान हुआ। मैंने उन दोनों धुप को उठाया और बाबा का धन्यवाद किया और साईं प्रार्थनाओ के प्रिंट के साथ आगे बढ़ाया। इस बार मैंने वो प्रार्थनाए पंडित जी को दी और उन्होंने स्वीकार कर लिया और बाबा की समाधी पर रख दिया। मैं बहुत खुश हुआ।

कृपया ध्यान दें कि साईं बाबा ने आरती के बाद ही प्रार्थनाओ की पर्ची को स्वीकार किया, पहले नहीं। मैंने उदी लेने के बाद द्वारकामाई में भी साईं बाबा का दर्शन किया।

हर गुरुवार को साईं बाबा की फोटो को द्वारकामाई से चावडी ले जाया जाता है क्योंकि बाबा हर दुसरे दिन चावडी में जाकर विश्राम किया करते थे। अब तक हर गुरुवार को शिर्डी में उसी का पालन किया जाता है।

हर गुरुवार को द्वारकामाई से चावडी तक एक जुलूस होता है।

मैंने जुलूस के समय के बारे में जानकारी निकाली और पता चला कि वह रात 9:15 बजे शुरू होगा। मैं तब तक इंतजार कर रहा था। ठीक 9:15 पर जुलुस की शुरूआत हुई, यह बोहुत ही रोचक था, ड्रम की आवाज़ के साथ लोग इकट्ठे हुए और साई बाबा के गाने बजने लगे। बोहुत ही मनमोहक दृश्य था। मुझे वास्तव में महसूस हुआ कि मैं जुलूस देखकर धन्य हो गया। मैं उस वायुमंडल के आनंद को अभिव्यक्त नहीं कर सकता हूँ ... ओह .... कितना मंत्र मुग्ध करने वाला था वो....

जुलूस समाप्त होने के बाद मैं अपने कमरे में 11 बजे तक पोहचा और मैंने सुबह 2 बजे का अलार्म लगाया ताकि मैं सुबह की 4:30 बजे की ककड़ आरती में भाग ले सकूँ। मुझे बताया गया था कि सुबह सुबह जल्दी ही कक्कड़ आरती देखने के लिए जाना पड़ता है, तो मैंने सोचा 2:00 बजे उठाना ही सही होगा। जब मैं सो कर उठा तो पहले से ही 3 बज चुके थे। मुझे चिंता थी कि मैं कक्कड़ आरती नहीं देख पाऊंगा। मैं सुबह 03:30 बजे मंदिर के लिए रवाना हुआ और कुछ लोगों के साथ मैं एक लाइन में शामिल हो गया। उस लाइन में केवल कुछ ही लोगों को देखकर मैं आश्चर्यचकित था। काफी समय बाद मुझे पता चला कि यह लाइन केवल विशेष आरती टिकट धारकों के लिए था। मेरे पास कोई टिकट नहीं थी। सुरक्षा अधिकारी सभी के टिकट की जांच कर रहा था लेकिन जब मैंने प्रवेश किया तो उसने मुझसे कोई टिकट नहीं मांगा और मुझे मंदिर के अंदर जाने दिया। मैं इस पर बोहुत हैरान हुआ, साई के आशीर्वाद के बिना यह संभव ही नहीं था। जब मैंने मंदिर में प्रवेश किया तो मुझे यह देखकर हैरानी हुई कि केवल मुझे और कुछ ही भक्तो को साई बाबा की मूर्ति के बिलकुल सामने खड़े होने की इजाजत मिली। मैं वास्तव में बाबा को अपने सामने देखकर बोहुत खुश था।

सुबह के 4:30 बजे ककड़ आरती शुरू हुई ... वह बोहुत ही आत्मविभोर करने वाला क्षण था जब सभी भक्त एक ही स्वर में बाबा की आरती गा रहे थे। मैं अपनी भावना को शब्दों में नहीं बता सकता।

मुझे 12 बजे की मध्यं आरती में भी सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला। मैं आरती के बाद मंदिर से निकल ही रहा था कि मुझे अचानक एक चीज़ याद आई कि मैंने बाबा से प्रार्थना की थी की यदि मेरे मित्र को मेरी कंपनी में नौकरी मिलेगी तो मैं कुछ दक्षिणा चढाऊंगा मंदिर में। बाबा की कृपा से उसे मेरे कंपनी में नौकरी मिल गयी पर मैं दक्षिणा चढाने भूल गया था।

देखिये बाबा की कितनी अद्भुत लीला है...वह आपको हमेशा याद दिलाते है यदि आप कुछ भूल गए हो तो और यह ध्यान रखते है कि जो उन्हें मिलना है वो उन तक अवश्य पोहुचे। यह साईं सत्चरित्र में भी लिखा है कि बाबा हमेशा उन् भक्तो को उनके वचनों का याद दिलाते है जो भी भूल जाते थे। मैंने भी याद आते ही कुछ पैसे निकाले, हुंडी में दाल दिया और मंदिर से बाहर आ गया। मैंने अपने रूम में आकर अपना बैग लिया और ट्रेन पकड़ने के लिए रेलवे स्टेशन की ओर निकल पड़ा जो 4 बजे की थी।

देखिये साई बाबा की कितनी सुन्दर और अद्भुत लीलाए है।

कृपया साईनाथ में विश्वास रखिये और मुझे यकीन है कि वह हमे हमेशा अपना आशीर्वाद देते रहेंगे और हमारा सही रास्ते पर चलने के लिए मार्ग दर्शन करेंगे।

जय साईं नाथ महाराज की जय ।


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