Monday, June 11, 2018

रविवार है नाम जाप का दिन बच्चो के लिए



Sunday Is Naam Jaap Day For Kids से अनुवाद

नाम जाप श्रृंखला में पिछले पोस्ट


  • जपते रहो “साईं साईं” – कलियुग की सबसे आसान साधना

  • लीलाएं जो दर्शाती है कि साईं बाबा स्वयं 24*7 साईं महाजाप के शिल्पकार है



  • कई दिनों से हमे इस आध्यात्मिक नाम जाप के पथ पर चलने और उसे शुरू करने के लिए जो भी प्रेरणा मिली उसे हमने आप सभी के साथ साझा किया हैं। हमें उत्कृष्ट प्रतिक्रिया मिली है और मुझे पूरा यकीन है कि भगवान साईं बाबा ने 2018 में इस महासामधि के शताब्दी वर्ष के उत्सव में अपने भक्तों के लिए कुछ खास योजना बनाई है। हमने जैसे पढ़ा है की उन्होंने किस प्रकार हेमाडपंत को सत्चरित्र लिखने की अनुमति दी, उसी प्रकार हमारे सभी विचारों पर भी वे सहमति दे रहे है। रीनानुबंध का आनंद लेते हुए, हम सभी इस कलियुग को साईंयुग के रूप में बनाने के एक लक्ष्य की ओर कार्य कर रहे हैं और इस प्रकार हमने अपने आस-पास कुछ अविश्वसनीय घटनाएं देखी हैं।





    भगवान साईं बाबा ने साईं भक्त अर्चनाजी को नाम जाप में बच्चों की भागीदारी के बारे में पहले ही बताया था, लेकिन यह न तो मुझे और ना ही साईं भक्त पूजा को पता था। जब हम नाम जाप संरचना की योजना बना रहे थे और निष्पादन पर चर्चा कर रहे थे, तब पूजा को निम्नलिखित विचार आया और पूजा ने कहा, मैं पहले सोच रही थी कि महाजाप में 20 मिनट के स्लॉट के लिए साईंएश का भी नामांकन दू और उसका साथ देने के लिए मैं भी उसके साथ जाप करू तब। “मैंने कहा यदि तुम साईंएश को जाप में नामांकन देना चाहती हो तो मुझे कृशांग को भी नाम जाप करवाने के बारे में सोचना चाहिए और क्यूँ ना हम एक अलग समूह बनाये सिर्फ बच्चो के लिए”। बाबा की प्रेरणा से एक सामान्य वार्तालाप में ही बच्चो के अलग समूह की योजना बन गयी।

    खैर, हम चाहते है न केवल हमारे बच्चे इस नाम जाप में भाग ले बल्कि कई सारे बच्चे इसका हिस्सा बनें। यह नाम जाप एक बीज बोने के समान है जो भविष्य में एक आध्यात्मिक पेड़ बनकर तैयार होगा। हम अपने कार्यो में इतने उलझने और कई सारे परेशानियों से घीरे रहने के कारन भूल जाते है की भगवान के चरणों में ही सच्ची शान्ति हैं। इस छोटी उम्र में नाम जाप का अभ्यास करने से यह यग साई युग में बदल जाएगा जहाँ इस उम्र के बच्चे और अगली पीढ़ी के युवा भी बिना किसी प्रयास के नामजप का अभ्यास कर सकते हैं और ध्यान करना उनके दैनिक कामों का हिस्सा बन जयेगा ।







    हम अपने बच्चों से सगुन पूजा करने की उम्मीद नहीं कर सकते, क्यूँकी उनकी शिक्षा और पर्यावरण की प्रकृति उन्हें तथ्यों पर विश्वास करने के लिए सिखाती है। कई बच्चे तो प्रौद्योगिकी(तेक्नोलोजी) में इस प्रकार घिरे रहते है वे अपनी स्वयम की इच्छा से जाप नहीं करेंगे। हमने जिस प्रकार हमेशा अपने माता-पिता के निर्देशों का पालन किया हैं, हालांकि हम अपने बच्चों को भी उसी प्रकार सिखाते हैं किन्तु इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वे भी हमारा अनुसरण करेंगे।



    किन्तु हम उन्हें अपने भगवान के हाथों में छोड़ सकते हैं और उनकी देखभाल करने की प्रार्थना कर सकते हैं। आज-कल के युवाओं को देखकर हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि वे उत्तेजित स्वाभाव के होते है और साथ ही लापरवाही, गैरजिम्मेदार, स्वार्थी, स्वतंत्र इच्छा के भी होते है। इसीलिए यदि उन्हें ऐसे सांचे में ढाले जहां उन्हें भगवान के नाम का जप करने का महत्व सिखाया जाए और उन चीजों का व्यावहारिक उदाहरण दिया जाए – जैसेकी हम उन्हें कह सकते है कि भगवान उन्हें हर समय देख रहे हैं और जो कुछ भी वो करते हैं भगवन सब जानते हैं। और वयस्कता की शुरुआत से ही वे सही रास्ते पर चल सकते हैं । हम उनसे रातो रात इन चीजों को सीखने की उम्मीद नहीं कर सकते। जैसे हम बच्चो को टीकाकरण (वक्सिनेशन) देते है ताकि भविष्य में कोई बड़ी बीमारी न हो उसी प्रकार नाम जाप का टीकाकरण देकर बच्चो को बुरी आदतों से बचने की कोशिश कर सकते है। इस पर साईं भक्त पूजा ने कहा है कि नाम जाप की इस नई यात्रा का सबसे अच्छी बात यह है कि (जब कान की बालिया गम हुई और फिर जिस प्रकार बाबा की कृपा से वापस मिली) उस घटना ने साइएश के मन पर नाम जाप की गहरी छाप छोड़ी है। और अब जब हम या वो किसी चीज़ में फंस जाते है तो वो कहता है अरे चलो वो 9 मिनट का साईं साईं करेगे उस दीन जैसे।



    साईं भक्त होने के नाते हम ये चाहेंगे की हमारे बच्चे भी साईं के पथ पर चले, किन्तु हम उनसे जोर-ज़बरदस्ती नहीं कर सकते। यह उनकी स्वयं की जीवन यात्रा है। किन्तु यदि हम यह आदत उनमे ढालेंगे तो वे स्वाभाविक रूप से उनसे जुड़े रहेंगे। अब जब कृशांग इतना तो बड़ा हुआ है की अपने तरीके से चीजों को समझे, तो मैं परिस्थितियों को बाबा से जोड़ने की कोशिश करती हूं और यह उसके मन पर छाप छोड़ता है। उदाहरण के तौर पर- एक दिन मैंने उससे कहा, "यदि तुम कुछ भी गलत करते हो और तुम्हे लगता है कि मैंने या किसी और ने तुम्हे नहीं देखा , तो ध्यान रखना भगवान बाबा तुम्हे देख रहे हैं। वह तुम्हारे साथ स्कूल, क्रिकेट, मॉल इत्यादि हर जगह जाते हैं और तुम अच्छा या बुरा जो भी करते हो वो सब जानते है। उसने फिर मुझसे पुछा, "क्या वह मुझे दंडित करेंगे, अगर मैं कुछ बुरा या गलत करू?"। मैंने उत्तर दिया, "वह कभी दंडित नहीं करते क्योंकि वह हमारे माता और पिता है। तब उसने व्यक्त किया कि क्या परिणाम होगा यदि मैं कुछ बुरा करता हूं? तो मैंने उत्तर दिया, "देखो, अगर तुम गलत करते हैं तो किसी ना किसी तरह वही गलत तुम्हारे साथ होगा"।



    इस वार्तालाप के अगले दिन, वह एक सुपर मार्केट के बाहर गोल घूम रहा और नाच रहा था, मैंने उसे कई बार चेतावनी दी की वो गिर जाएगा और उसे चोट लग सकती है। पर उसने मेरी बात नहीं सुनी और गोल घूमता रहा आखीर वह गिर गया और उसके हथेलि में चोट लगी। इसपर उसने कहा मैंने आपकी बात नहीं मानकर गलत किया, इसीलिए मैं गिर गया और चोट लगी। मैंने गलत किया इसीलिए बाबा ने इस तरह मुझे दंडित किया, है ना ?

    उसने अज्ञानता में दंडित शब्द कहा, किन्तु उसके कहने का अर्थ था की उसके गलत काम का परिणाम उसे मिला और उससे भी महत्वपूर्ण यह है कि वह समझ गया कि मेरी बात ना सुनना उसके लिए गलत काम था। इस तरह हम बाबा द्वारा सरल कार्यों में भी बच्चों को शिक्षा दे सकते हैं। मैं भी यही मानती हूं, और नाम जाप में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना इस लक्ष्य की ओर बढ़ने का एक छोटा कदम है। बच्चो में साईं सत्चरित्र की जो शिक्षाए है वह डालना भगवान बाबा द्वारा हमे सौपी गयी एक जिम्मेदारी है (ऐसा मेरा मानना है)। केवल पढ़ने से कोई लाभ नहीं, इसे तो हम वर्षों से पढ़ रहे हैं, किन्तु हमें उसकी शिक्षा को क्रिया में परिवर्तित करने की आवश्यकता है और तब हमारे बच्चों भी स्वाभाविक रूप से इसका पालन करेंगे।

    आइए अब बच्चों की नाम जाप की प्रक्रिया और उसके निष्पादन के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।

    • नाम जाप शिवरात्रि से शुरू होगा यानी 13 फरवरी, 2018
    • बच्चे जो “ॐ" या "साई" भी बोल सकते हैं और 18 साल की उम्र तक के बच्चे इस नाम जाप के लिए पात्र हैं।
    • चूंकि सभी बच्चे रविवार को घर पर उपलब्ध होंगे, इसीलिए यह नाम जाप केवल रविवार के लिए है।
    • बच्चे कई बार मंत्र का जप कर सकते है। उदाहरण के लिए: यदि बच्चा छोटा है तो उसका कोई सोने या खाने का निश्चित समय नहीं है, तो वह "9" बार जप कर सकते है और कुछ समय बाद फिर "9" बार जप कर सकते है। जिस शिशु ने अभी बोलना शुरू किया है, तो उनके माता-पिता पहले मंत्र का जाप करे फिर बच्चे उसे दोहरा सकते हैं।
    • किसी भी बच्चे के लिए कोई तय स्लॉट नहीं होगा।
    • बच्चे के माता-पिता में से एक हमारे व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा होंगे और वे अपने बच्चे की ओर से रिपोर्टिंग करेंगे।
    • कोई यदि बच्चा बहुत छोटा है और नामांकित किया गया है, किन्तु उसे जाप करने का मन नहीं है, तो उन्हें उनकी पसंदीदा गतिविधि या खेल में संलग्न करते हुए जाप करा सकते है और इसे एक अनिवार्य कार्य के रूप में लागू न करें अन्यथा इस तरह वे जाप में कोई दिलचस्पी नहीं लेंगे, जो निश्चित रूप से हमारा उद्देश नहीं है।

    अगला पोस्ट: कैसे इस आध्यात्मिक उद्यम का नाम अनंत अखण्ड साईं महाजाप रखा गया

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    Translated and Narrated By Rinki Transliterated By Supriya

    © Sai Teri Leela - Member of SaiYugNetwork.com

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