Saturday, June 9, 2018

लीलाएं जो दर्शाती है कि साईं बाबा स्वयं 24*7 साईं महाजाप के शिल्पकार है

Leelas Showing That Lord Sai Baba Is The Architect Of Sai Mahajaap 24x7से अनुवाद

नाम जाप श्रृंखला में पिछले पोस्ट



  • जपते रहो “साईं साईं” – कलियुग की सबसे आसान साधना
    • श्री साईं बाबा 9 साल से नाम जाप की तय्यारी कर रहे थे-साईं भक्त पूजा- साईं भक्त अर्चना


    हमने पिछले पोस्ट में देखा कि साईं भक्त पूजा जी को किस प्रकार पिछले 9 सालों से नाम जाप की प्रेरणा मिल रही थी लेकिन वह ये नहीं जानती थी की भगवान साईं बाबा ने सब कुछ पूर्व ही निर्धारित किया हुआ है। और वह भविष्य की घटनाओ को आकार दे रहे थे। हमने देखा है कि जो कुछ भी हम उनकी सेवा से संबंधित सोचते हैं, वह हमेशा समय से पहले ही उसे आकार दे देते हैं। सत्चरित्र के अनुसार, जिस प्रकार बाबा गया और काशी के दौरे पर शामा और अप्पा कोटे से पहले ही पोहच गए थे। आज के पोस्ट सभी के लिए एक प्रेरणा हैं क्योंकि भगवान बाबा ने व्यावहारिक रूप से दर्शाया है कि नाम जाप सभी के लिए है। चलिए अब उनकी प्रेरणा के विवरण की ओर बढ़ते हैं।

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    वो जो बहुत ही भाग्यशाली हैं और जिनके पाप नष्ट हो गए हैं, वे ही मेरी उपासना की ओर अग्रसर होते हैं। यदि तुम हमेशा "साईं" "साईं" जप करोगे, तो मैं तुम्हे सात समुद्र पार ले जाऊंगा। इन शब्दों पर विश्वास रखो, तुम्हे अवश्य ही लाभ होगा। मुझे किसी प्रकार के अष्टांग पूजन या षोडशोपचार की आवश्यकता नहीं है। (अध्याय -13)

    जब श्रद्धालु में प्रेम और श्रद्धा का स्रोत प्रवाहित होगा, तब विट्ठल प्रकट होंगे (अध्-4)

    बाबा कहते हैं कि सभी प्रकार की चतुराई छोड़ दो और सदैव "साईं" "साईं" स्मरण करो। यदि तुम एसा करोगे तो तुम्हारे सारे बंधन छूट जायेंगे और तुम मुक्त हो जाओगे। अध्-10)


    साईं सत्चरित्र के ये कुछ दृष्टांत हैं जहाँ बाबा ने कहा है कि कलयुग में भगवद नाम का जाप सबसे सरल, प्रभावी और फलदायी साधना है। जब मुझे बाबा के कई सन्देश, फोटो व विडियो प्राप्त हो रहे थे, तब मुझे ऐसा लगा कि बाबा मुझे प्रेरित कर रहे हैं कि पृथ्वी पर 24*7 महाजाप की एक और सेवा संपूर्णआरम्भ हो। परन्तु शंकालु मानवीय प्रवृत्ति के कारन, मैने हेतल जी से 3 जनवरी को चर्चा करी की इसे सिर्फ गुरुवार तक सीमित न रखकर सातों दिन के लिए किया जाये। उन्होंने बड़ी खूबसूरती से समझाया कि बाबा जीवंत हैं और साईं सत्चरित्र की घटनाओं की पुनरावृत्ति कर रहे हैं। उन्होंने कहा जैसे कि बाबा ने अपने दो भक्तों श्रीमान बूटी एवं शामा को स्वप्न में महासमाधि मंदिर बनवाने की आज्ञा दी, इसी प्रकार, वे अब अपने भक्त राखी जी, मंजू जी, अर्चना जी व तुम्हारे द्वारा साईं महाजाप के लिए प्रेरित कर रहे हैं और मुझे भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहे हैं”। उनकी यह बात सुनकर मुझे बहुत प्रोत्साहन मिला। जब भी वे मुझे अपना ही प्रतिरूप कहकर संबोधित करती हैं, मुझे बहुत अच्छा लगता है। हालांकि मैं नहीं जानती कि मैं ऐसा कहलाने लायक हूँ भी या नहीं।

    अब मुझे इसके लिए एक विवरण लिखना था, परन्तु मैं समझ नहीं पा रही थी कि सम्पूर्ण विश्व में बिखरे हुए भक्तों के लिए एक प्रभावी विवरण कैसे लिखूं? लेकिन बाबा स्वयं मुझे प्रेरित कर रहे थे। मुझे यह सोचकर परेशानी हो रही थी कि इस बार बाबा ने महापारायण की भांति कोई स्वप्न भी नहीं दिया। 12 जनवरी को एक अजीब घटना हुई। मेरी माँ की सोने की कान की बालियाँ खो गयी थी। उन्हें तो यह भी नहीं मालूम था कि वह कब से गुम गई थी। दो दिन पहले उन्होंने उसे अपने बटुए में रखा था। उन्होंने यह भी बताया था कि बटुए में एक पांसा (dice) भी था। मेरा बेटा सुबह से ही माँ के बटुए से खेल रहा था और उसने पांसा भी निकाला। संभव था कि पांसा निकालते वक्त बालियाँ भी गिर गया हो, लेकिन माँ को तो शाम को पता चला कि वह गायब है। दरअसल माँ ने सोचा कि शाम को पहनूंगी क्योंकि शाम को मेरे पति मुझे और बेटे को लेने आ रहे थे। शाम 6 से 7 बजे से खोज-बीन चालू थी, माँ को तो याद भी नहीं था कि बालियाँ दो दिन पहले गिरी हैं या साईंश ने पांसा खोजते समय गिरी है। उनको लगा कि अब उसका मिलना नामुमकिन है क्योंकि पूरे फर्श की सफाई भी हो चुकी थी। हो सकता था कि बाई ने सफाई करते समय कचरे के साथ बाहर फ़ेंक दी हों क्यूंकि वह काफी छोटी थी। तभी मेरे पति भी आ गए। रात को भोजन के बाद 10 बजे फिर माँ खोजने में लग गई। तब साईंश, मेरे पति और पिताजी भी इसी अभियान में जुट गए। साईंश बार-बार कुछ चमकती हुई चीज लेकर आता और पूरे जोश से कहता कि "नानी, देखो मुझे मिल गया।" हम सभी उत्सुकता से देखते, लेकिन वो कोई पत्थर निकलता। उसकी मासूमियत देखकर में भी टोर्च लेकर सोफे के नीचे खोजने लगी। फिर मुझे याद आया कि मुझे स्तवन मंजरी का पाठ करना है, तो मैं पाठ करने लगी। चूंकि पाठ में विघ्न हो रहा था, इसलिए मैंने सबको खोजना बंद करने के लिए कहा। जाने कहाँ से मुझे प्रेरणा हुई और मैंने 200% विश्वास से कहा की मुझे शांति से पाठ ख़त्म करने दो, उसके बाद हम पाँचों मिलकर, पूरी श्रद्धा से 9 मिनट तक साईं-साईं जप करेंगे, फिर देखना साईं महाजाप का महत्त्व और बाबा का चमत्कार। तब सभी तुरंत 9 मिनट जप के लिए तैयार हो गए। मेरा 4 साल का बेटा साईंश भी। मुझे लगा कि यह बाबा की ही लीला है कि मेरे पिताजी महाजाप 24*7 के लिए स्वयं को नामांकित करने के लिए राजी हो गए, क्योंकि वे तो 20 मिनट के जाप के लिए राजी ही नहीं हो रहे थे और वो भी आवंटित समय पर। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया था कि तुम मुझ पर दबाव नहीं डाल सकती। तब मैंने कहा कि मैं ऐसी चीजों के लिए किसी पर दबाव नहीं डालती (मुझे विश्वास है कि बाबा अपने लोगों को खुद खींच लेंगे)। हालाँकि मैने उन्हें बलपूर्वक कहा था की वे महापारायण एवं 365 दिनों का परायण करें। साथ ही मैंने साईं सत्चरित्र के उस अध्याय का उद्धरण भी उन्हें दिया जहा बाबा ने शामा को बलपूर्वक कई पुस्तकों, विशेषकर विष्णु सहस्त्रनाम पढने कहा था।

    बाबा के समक्ष स्तवन मंजरी का पाठ करने के बाद, 9 मिनट का जाप आरम्भ करने के पूर्व मैंने बाबा से कहा-"बाबा, आप सब कुछ जानते हो, आप यह भी जानते हो कि इस अनंत ब्रह्माण्ड में वह छोटी सी कान की बाली कहाँ है। बाबा प्लीज़, नाम-जप का महत्त्व कम नहीं होना चाहिए। प्लीज़, मेरे विश्वास और अपने नाम की महिमा की रक्षा करना। मैं नहीं जानती कि क्यों मैंने इतने विश्वास से कहा कि 9 मिनट के जाप के बाद हमें बालियाँ मिल जाएँगी। बाबा आपने मुझे ऐसे क्यों कहने दिया? आप ही कहते हो न, कि जब नाम-जाप प्रेम और विश्वास के साथ किया जाता है तो भगवान विट्ठल प्रकट होते हैं, तब यह बाली कौन सी बड़ी चीज है? सवाल एक मामूली से सोने की बाली का नहीं, जिसकी कीमत चंद हज़ार रूपये होगी। लेकिन आप जानते हो बाबा, कि यदि यह मिल जाती है तो मुझे नाम जाप की महिमा का विवरण लिखने के लिए एक आधार मिल जायेगा और सम्पूर्ण विश्व के लोगों को आजीवन, महाजाप 24*7 के लिए प्रेरणा मिलेगी। आप अच्छी तरह से जानते हो कि मैं सचमुच चाहती हूँ कि आपका नाम जाप, क्षण भर के लिए भी ना रुके, सम्पूर्ण पृथ्वी पर, जब तक हमारा अस्तित्व है, अरबों, खरबों, अनगिनत बार, नाम-जाप लगातार चलता रहे। मुझे किसी भी लाभ की आकांक्षा नहीं, और न ही मुझे सोने की बालियों की कीमत की परवाह है। यदि आपको लगता है कि मै जो कह रही हूँ वह सत्य है, और मेरा कोई भी व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं है, तो वह बालियाँ मिल जाना चाहिए। आज जो साईंश देखेगा, उस घटना का सीधा प्रभाव जीवन पर्यंत उसकी आत्मा पर पड़ेगा। अब आप ही फैसला करें की उसके कोमल मन में विश्वास का बीज बोना है या नहीं।"

    उसके बाद साईंश सहित हम पाँचों लगातार केवल साईं साईं साईं.... जाप 9 मिनट तक करने लगे। साईंश की प्रार्थना का प्रेम, विश्वास और प्रगाढ़ता देखकर मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ और उसकी माँ होने का बहुत गर्व हुआ क्योंकि मुझे उसमे बाबा के एक महान, सच्चे और विशुद्ध भक्त के दर्शन हुए। मैंने 9 मिनट का अलार्म लगाया था। साईंश बाबा के ठीक सामने बैठा था। पहले 4 से 5 मिनट तक उसने बिना रुके किया, जो कि मेरे लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं था। फिर वो मेरे पास आया और बोला कि बालिया मिल गयी क्या? हमको और कितनी देर तक करना है? मै जाप करती रही और बाकी सभी जाप करते रहे। तब वह भी अपने जगह वापस आ गया और जाप करने लगा। फिर 7 मिनट बाद वो आया, और फिर वापस जाकर 9 मिनट समाप्त होने तक जाप करता रहा। वो पहली बार जाप कर रहा था। बाबा शायद यही दर्शाना चाह रहे थे कि यह इतना सरल है कि एक 4 साल का बालक भी इसे कर सकता है। ठीक उसी समय अलार्म बजा, साईंश सोफे पर खोजने लगा। मेरे पति बोले कि हम वहा पहले ही खोज चुके हैं, वहां नहीं है। इस पर जो उत्तर साईंश ने दिया उसने मेरे ह्रदय को रोमांच से भर दिया। उसने कहा – "पापा, मुझे पता है, पर साईं बाबा जादू से लाने वाले हैं और वो कुछ भी कर सकते हैं"। फिर मैंने भी बाबा से कहा- "बाबा अब बहुत देर हो गई है, हमें घर भी जाना है, हमारे पास और समय नहीं है। मैं जानती हूँ कि यह आपकी ही लीला है, जिससे मेरे परिवार के लोग नई सेवा से मुझे न रोकें, मेरे विवरण लेखन को एक आधार मिले और साईंश के भीतर विश्वास का बीज अंकुरित हो सके।

    तो बाबा अब देर न करो और हमें दे दो। यदि नहीं, तो अपने मुझे 9 मिनट के जाप के लिए प्रेरित ही क्यों किया?" मेरे इतने कहने के तुरंत ही बाद, घोर आश्चर्य!! मेरे पति को सोफे के पीछे, बाबा के पास ही बालियाँ मिली। यह बाबा का ही चमत्कार था जो कि सभी ने इतने करीब से देखा। मेरे बाबा में और साईं महाजाप में विश्वास की विजय हुई। साईंश ख़ुशी से उछल पड़ा और मेरी माँ ने आंसू भरी आँखों से मुझे गले लगा लिया। मेरे पिताजी अपनी जगह से उठे और बोले, आज से मैं वो सब करूँगा जो यह लडकी (मैं, उनकी पुत्री) कहेगी। मुझे ऐसा लगा मानो हमने विश्व को जीत लिया हो। सभी हर्षोल्लास से सराबोर थे, सिर्फ इसलिए नहीं कि सोने की बालियाँ मिली बल्कि इसलिए की बाबा का चमत्कार हम सबने देखा। और आश्चार्य की बात यह है की हम सभी पहले भी वहां खोज चुके थे। मैंने तो टोर्च लेकर खोजा था पर उस समय हमें नहीं मिली थी।

    मैंने एक तस्वीर भी खीची, जब मैंने साईंश को कहा कि बाबा को धन्यवाद दो। इस तस्वीर में आप देख सकते हैं, एक छोटा सा, निष्कपट और सच्चा भक्त, साईं साईं जप करते हुए बाबा को धन्यवाद दे रहा है। यकीन मानिए साईंश को 9 मिनट तक प्रार्थना करते हुए जाप करते देखना अविस्मरणीय था। तो यदि 4 साल का एक बच्चा जाप कर सकता है तो हम बड़े क्यों नहीं? बाबा ने फिर बता दिया कि साईं महाजाप सिर्फ उनके लिए नहीं है जो पढ़ सकते है, बल्कि कोई भी बूढा हो या जवान, शिक्षित हो या अशिक्षित हर कोई साईं-साईं जप सकता है। यह दर्शाता है कि यह सबसे सरल साधना है और बाबा स्वयं महाजाप के लिए भक्तों को चुनेंगे और नामांकित करेंगे। जैसे कि उन्होंने ही मेरे पिताजी को, जो कि एक अड़ियल व्यक्ति हैं, उन्हें नामांकित किया।

    अब कल के पोस्ट पर जाते हैं, जब उसे लिखते हुए मुझे एहसास हुआ कि बाबा इस सेवा के लिए 9 वर्षों से तैयार कर रहे हैं और मैंने खुद भी इसके महत्त्व को हमेशा अनुभव किया है| बाद में मुझे याद आया कि 2016 में मुझे "ॐ श्री साईं अरोग्यक्षेमदाय नमः" के जाप से संबद्ध बहुत ही अलग अनुभव हुआ था। आप सभी उस अनुभव को “Baba’s Grace On My Child” उपर पढ़ सकते हैं। इसे मैंने जून या जुलाई में भेजा था, परन्तु 27 दिसम्बर 2016 को वह प्रकाशित हुआ था।

    बाबा ने मुझे 01 जनवरी 2018 में शिर्डी बुलाकर आशीर्वाद दिया और अब मुझे लगता है कि एक और महान सेवा के लिए उन्होंने आशीर्वाद दिया है। 3 जनवरी से ही मुझे नाम जाप सम्बन्धी अनुभव होने लगे। 4 जनवरी, गुरुवार को पारायण करते हुए मुझे एहसास हुआ कि पिछले 5-6 सप्ताह से मुझे जो अध्याय पाठ के लिए मिल रहा था उनमें वह अध्याय रहता ही था जिसमे विष्णु सहस्त्रनाम की महिमा का उल्लेख किया गया है। वह बाबा द्वारा मेरे लिए संकेत ही था जो मुझे 11 को और फिर 18 जनवरी 2018 को विष्णु सहस्र नाम और नाम जाप के रूप में निर्देश मिला। यह स्वयं बाबा ही मुझे एहसास करा रहे थे कि पिछले 7 सप्ताह से मुझे लगातार ये 2 शब्द ज़रूर मिलते रहे। यह सभी घटनाएँ मिलकर मुझे आजीवन साईं महाजाप 24*7 की ओर इंगित कर रही थी। मैने भी महसूस किया की बाबा किसी न किसी प्रकार इस महाजाप 24*7 की सेवा के लिए मुझे हर दिन प्रेरित कर रहे थे। ये तो एसा हो रहा था कि 365 दिन के मेरे साईं परायण के अध्याय भी मुझे साईं साईं जाप करने प्रेरित कर रहे थे, या टीवी सीरियल "मेरे साईं" में भी, जब पुलिस प्रभारी विष्णु, जीवन को पीट रहा था। जब जीवन ने बाबा को याद किया और ॐ साईंराम जप आरंभ कर दिया तो बाबा ने ना ही केवल उसके पूरे दर्द को गायब कर दिया बल्कि उसे ऐसा महसूस कराया जैसे उस पर फूल बरस रहे हों।

    सिर्फ साईं सत्चरित्र या टीवी सीरियल "मेरे साईं" द्वारा ही नहीं, बल्कि कभी कभी कुछ ऐसे अनुभव भी मिले जो नाम जाप से सम्बंधित थे। 8 जनवरी को कुछ जरूरी काम था। इसके लिए हमने ग्रूप प्रार्थना की, और यह भी तय किया कि उस व्यक्ति के लिए हम सभी 10 मिनट तक साईं-साईं जाप करेंगे और मैने कहा-"बाबा लगभग 9 वर्षों से यह काम लंबित(pending) है और हर बार हम उम्मीद करते है पर निराशा ही हाथ लगती है। हम सभी उस व्यक्ति के लिए साईं साईं का जाप करेंगे और यदि इस बार महाजाप सफल होता है तो, इतने वर्षों से लंबित वह कार्य भी सफल ही होना चाहिए। और जब मुझे पता चला की काम हो गया तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ और खुशी से मेरी आँखों में आंसू आ गये। हम 15 जनवरी को बाबा को धन्यवाद देने के लिए शिर्डी गये। तो आप सभी समझ सकते हैं कि कितना कठिन और असंभव कार्य था जो की बाबा ने संभव कर दिया।

    2 जनवरी को मेरे ऑफिस में सीएफओ आये और मुझे बोले कि 19GB की एक महत्वपूर्ण फाइल है जो कि उनके कंप्यूटर से गायब हो गई है और उनके पास बैक अप भी नहीं है। उन्होंने बहुत प्रयास किया लेकिन वो फ़ाइल उन्हें नहीं मिली। उन्होंने मुझे उसे कंप्यूटर पर खोजने को कहा। चूँकि मुझे दुसरे जरूरी काम थे इसलिए मैने तकनिकी कुशल व्यक्ति को यह काम करने को कहा, वह बहुत कुशल भी था ऐसे कार्यो मे। उस व्यक्ति ने भी आधे दिन तक कई तरीकों से कोशिश की परन्तु वह भी खोज नही पाया और बोला की सिस्टम से ही शायद डिलीट हो गयी है। अब आखरी रास्ता था कि हार्ड डिस्क को डाटा रिकवरी के लिए दिया जाये क्योंकि फाइल डी ड्राइव में थी। हमें हजारों रूपये देने पड़ते और 2-3 दिन का समय भी लगता। उसने ये भी कहा कि ज्यादातर बार ऐसा होता है कि हार्ड डिस्क की डाटा रिकवरी में फाइल मिल जाती है। अगले दिन सुबह मै सी.एफ.ओ के केबिन में गई और उनसे कहा की हमें कंप्यूटर रिकवरी के लिए देना होगा। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह थी कि क्या कोई हमारे कंपनी से है जिसने ऐसा किया हो? मैंने उनसे कुछ बात की और पता चला की कंप्यूटर पर पासवर्ड था और कुछ दिन पहले ही उन्होंने किसी कर्मी को फ़ोन पर कंप्यूटर पर डी ड्राइव में काम करने को कहा था। यदि उसकी गलती से फाइल डिलीट हुई भी हो तो वह रीसायकल-बिन में मिल सकता है। तभी मेरी नज़र उनके केबिन में बाबा की बड़ी सी फोटो पर गई जिस पर पुराना ही हार था। मैने पता किया की हार क्यों नहीं बदला है तो पता चला कि हर दिन बदला जाता है लेकिन उस दिन हार आया ही नहीं। जब मैने बाबा की आँखों में देखा तो मेरे भीतर की आवाज़ आई कि रिकवरी में भेजने से पहले एक बार मैं भी कोशिश करके देख लूँ, मैने फाइल का नाम पूछा तो उन्होंने कहा- की सचिन ने हर संभव कोशिश कर ली है। अब और समय बर्बाद करने का कोई फायदा नहीं है। तब जैसे बाबा ने ही मार्गदर्शन किया, मैने उनसे 3 चीज़े पूछीं और उन 3 चीज़ों के आधार पर मैने खोजना शुरू किया। 5 से 10 मिनट तक सर्च चलता रहा और आधे सेकंड के भीतर ही फाइल मिल गई। वे इतना खुश हुए कि बोले यह किसी चमत्कार से कम नही। आज तुम्हारी डिग्री काम आई। तुमने वह कर दिखाया जो सचिन- टेक्निकल एक्सपर्ट नहीं कर सका। परन्तु यह मैने नहीं बल्कि सबसे महान इंजिनियर मेरे साईं ने चमत्कार कर दिखाया था। उनका कहना था कि यदि रिकवरी के लिए भी भेजते तो संदेह था कि फाइल रिकवर हो पाती या नहीं। प्रश्न धन का नहीं था बल्कि समय की कमी और उस फाइल की आवश्यकता का था। मुझे मालूम था कि यह किसी और का नहीं बल्कि साईं ने ही किया था क्योंकि जब मैं साईं बाबा की फोटो पर चढ़े सूखे हार के बारे में पूछ रही थी तब सिर्फ एक बार फोटो को देखर मैने साईं कहा था, और उसी का यह चमत्कार था। मैने प्रार्थना नहीं की थी लेकिन मै लगातार भीतर साईं को याद कर रही थी और कह रही थी की मुझे निराश न करना।

    बाबा ने फिर यह बताया की भगवन स्मरण करना एवं केवल एक बार भी प्रेम से चेतन अथवा अवचेतन मन से नाम जाप से ही बहुत कुछ अच्छा हो सकता है, कई चमत्कार हो सकते है।

    उसी सप्ताह, एक दिन मेरी ननद हर्षा ने मुझे कॉल किया और बताया की "मेरे साईं" सीरियल से प्रेरित होकर उसने “राम कृष्ण हरी” जाप आरम्भ किया है और अब वह दिन भर काम करते हुए भी जाप करती रहती है और उसके सास-ससुर भी करते है। हालाँकि जिस एपिसोड की वह बात कर रही थी वह काफी पुराना था लेकिन बाबा यह चाह रहे थे कि किसी न किसी तरह मुझे इसकी स्मृति होती रहे।

    मैने सोचा कि पहले 7 दिनों के लिए 7 सबसे जिम्मेदार लोगों को चुनकर प्रिंसिपल बनाऊ। मैने कुछ लोगों से बात की थी और कुछ लोगों से बात करना बाकी था। पिछले 3 दिनों से मेरे अंतर्मन से आवाज़ आ रही थी कि लवीना जी को कॉल करूँ लेकिन कर नहीं पाइ। आखिरकार रात को सोने से पहले, मेरे महापारायण फ़ोन में हजारों मेसेज पड़े थे (चूंकि इन्हें बिना पढ़े क्लियर करना संभव नहीं था। इसलिए हेतल दी, मेरी आत्मिक बेहेन के मार्गदर्शन के अनुसार, मैं हमेशा मानती हु कि बाबा वही मेसेज मुझे पढ़ाएंगे जो वो चाहते हैं और जो ज़रूरी होगा)। तभी मेरी दृष्टि लवीना जी के मेसेज पर गयी, जो कि 3 दिसम्बर को आया था। उन्होंने साईं साईं लिखने के बारे में भेजा था और किसी भक्त द्वारा लिखे गए 4 पेज की फोटो भी भेजी थी। कितना सही समय था इस मेसेज को पढने का। जो मेसेज 3 दिसम्बर को भेजा गया वह अचानक इसी दिन मेरे फ़ोन में कैसे खुला? मै समझ गई कि बाबा ही चाहते हैं कि मै उन्हें फ़ोन करूँ। चूंकि रात काफी हो गई थी इसलिए मैंने उन्हें मेसेज किया कि बाबा के एक और काम (सेवा) के लिए मुझे बात करनी है।

    सुबह जब उठी तो देखा उनका मेसेज था की बाबा के काम के लिए कभी भी कॉल कर सकते हो और वे उस समय शिर्डी ही जा रही थी। कितना सही समय था.. मैंने तुरंत कॉल किया और उनका सेवा भाव देखकर मुझे ख़ुशी हुई की मैं उन्हें आधी रात को भी, बिना किसी संकोच के, बाबा के काम के लिए कॉल कर सकती हूँ। मुझे यह जानकार आश्चर्य हुआ कि वो भी पिछले 3 दिनों से मुझे याद कर रहीं थीं। जैसे मैं उन्हें याद कर रही थी और वे मुझसे मिलना चाह रही थीं (वे भी पुणे में ही रहती हैं लेकिन हमारी कभी मुलाकात नहीं हुई थी) क्यूंकि महापारायण और बाबा की सेवा से उनके जीवन में कई अच्छे बदलाव आये है। यह फिर से दर्शाता है कि बाबा स्वयं सब कुछ कर रहे हैं। लाविना जी ग्रुप की प्रिंसिपल की जिम्मेदारी के लिए और किसी भी दिन के लिए तैयार थी। मैंने उन्हें यूं ही मंगलवार कह दिया और यह भी कहा की यदि कोई भक्त बुधवार या किसी अन्य दिन नहीं करना चाहे तो मैं उन्हें उस दिन के लिए शिफ्ट कर दूंगी। वे सभी बातों से सहमत थी और हमें विश्वास था कि बाबा ने उन्हें शिर्डी में नई सेवा करने के लिए ही आशीर्वाद देने के लिए ही बुलाया है।

    अगले दिन 9 जनवरी की शाम, मैंने सोचा कि एक और प्रिंसिपल तय करूँ (24 घंटे सेवा के लिए 7 में से 4 तय किये गए थे)। सारी बातें समझाने में लगभग 20 मिनट का समय लगता था, इसलिए मैंने सोचा की आज दिन व्यर्थ न करूँ। परन्तु यह केवल हमारी धारणा होती है कि हम कर रहे हैं, यह जानते हुए भी की बाबा ही कर्ता हैं। यह तब सिद्ध हो गया जब उसी रात 7 प्रिंसिपल तय हो गये और मुझे बड़ी ख़ुशी हुई क्योंकि मैं सोच रही थी की केवल एक ही हो पाएगी। हेतल दीदी से बातचीत के आधार पर, मैंने तय किया कि इसे महा शिवरात्रि को शुरू किया जाए और फिर चैत्र रामनवमी के दौरान 7 दिन तक नाम सप्ताह करे और अन्य सभी दिन आवंटित स्लॉट के अनुसार करे (आगे की पोस्ट में विवरण के लिए प्रतीक्षा करें)। पता नहीं कैसे मैं, महाजाप के व्हाट्स एप्प ग्रुप में लवीना जी को ऐड करना भूल गयी और याद आने पर मैंने तुरंत ऐड किया। मेरे दिमाग में था की उनसे व्यक्तिगत रूप से पूरे प्लान को समझाना होगा क्यूंकि उन्हें मैंने बाद में ऐड किया था, लेकिन मैं वह भूल गई थी। इसी बीच यू.एस.ए. से राखी जी का कॉल आया कि उनको रविवार के बदले कोई और दिन कर किया जाये। मुझे पता है बाबा ने ही सभी को दिन दिए थे, इसलिए मैंने हाँ कह दिया और मंगलवार दे दिया (जो के लवीना जी को दिया हुआ था) और कहा की मैं लवीना जी को बता दूँगी कि उन्हें रविवार मिला है।

    बाबा ने ही भूमिका बना दि थी कि मैं उनसे बात करूँ (उनका दिन बदलने के सम्बन्ध में )। लेकिन मैं फिर भूल गई, और मुझे याद तब आया जब राखी जी का फिर से कॉल आया कि उनके लिए रविवार ही सही है क्योंकि यह बाबा ने ही उनके लिए चुना है। दरअसल यह बाबा की ही लीला थी, जो यही समाप्त नहीं हुई। कल यानि 19 जनवरी को लवीना जी ने कॉल किया और कहा की उन्हें पता ही नहीं कि साईं महाजाप, इस महाशिवरात्रि से आरंभ हो रहा है उन्हें ये किसी दुसरे के द्वारा पता चला। तब मुझे याद आया कि मै उन्हें व्यक्तिगत तौर पर प्लान बताने वाली थी लेकिन भूल गई थी। यह बाबा की ही दया थी क्यूंकि सामान्य तौर पर मैं भूलती नहीं हूँ, और अब यह भी बाबा की ही दया थी कि वे मुझे कुछ चीज़े भुला रहे थे। उन्होंने भी बताया कि वे किसी से कह रही थीं कि पिछले कुछ सालों से उन्होंने महाशिवरात्रि के दिन किसी प्रकार की पूजा नहीं की है, और अब उनकी इच्छा भी नहीं होती क्योंकि इसी दिन उनकी बेटी की मृत्यु हुई थी। तो क्रोध और निराशा के कारण वे इस दिन कुछ नहीं करती। जब मैंने फ़ोन रखा तो मुझे एहसास हुआ की लवीना जी का दिन मंगलवार है और साईं महाजाप महाशिवरात्रि से आरम्भ हो रहा है और वह भी मंगलवार है। मुझे हमेशा लगता था कि वो प्रिंसिपल कितना भाग्यशाली होगा जिसका दिन महाशिवरात्रि पर पड़ेगा। (हालाँकि क्यूँकि यह एक महान दिन है इसीलिए सतो दिनों के लोग 13 फ़रवरी को जाप करेंगे)। इस सभी से साबित होता है की बाबा ने न केवल प्रिंसिपल चुने और उनके दिन दिए बल्कि वे स्वयं ही 200 भक्तो को जाप के लिए भी चुनेगे।

    जब शुक्रवार को मैं अर्चना जी का पोस्ट पढ़ रही थी, तो मेरे रोंगटे खड़े हो गये जब उन्होंने कहा कि बाबा वर्षा जी के स्वप्न में आये थे और कहा कि हर ग्रुप में 200 भक्त होंगे जिनमे वृद्ध और बच्चे भी सम्मिलित होंगे। यकीन मानिए मेरे और अर्चना जी के बीच कभी भी इतनी चर्चा नहीं हुई थी। मै दंग रह गई कि जो हमने प्लान किया है (वास्तव में बाबा ने) ठीक वैसा ही नंबर उन्हें कैसे पता चला, और इसी आधार पर ही हम कहते रहे कि कुल 1400 सीट हैं (7*200=1400) जो पहले आएगा उसे पहले सीट मिलेगी। कल का जो पोस्ट था उसमें मेरी और राखी जी की चर्चा एवं नेहा और मंजू जी की चर्चा से भी यही साबित होता है कि यह सब स्वयं बाबा ही कर रहे हैं और हम अत्यंत भाग्यशाली हैं की बाबा ने हमें अपना निमित्त बनाया।

    तो यह सारी साईं लीलाएं हैं जो दर्शाता है कि साईं बाबा स्वयं ही इस महाजाप 24*7 के शिल्पकार हैं जहा वृद्ध और युवा, शिक्षित और अशिक्षित को शामिल किया जिससे के सम्पूर्ण धरा पर चल-अचल विश्व पर इसका प्रभाव हो सके।

    साईं नाम अनंत है साईं नाम अनमोल है, जीवन सफल हो जायेगा, साईं साईं बोल, साईं साईं बोल...


    तो हम सभी साईं के बच्चे, अपनी चतुराई त्याग कर केवल साईं जाप करें!

    साईं साईं जाप करें, साईंवाद का प्रसार करें और साईं युग में प्रवेश करें.

    अगला पोस्ट : बच्चो के लिए रविवार है नाम जाप का दिन

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    Translated and Narrated By Rinki Transliterated By Supriya

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