Friday, June 15, 2018

भक्तो के अनुभव – मैं, भूपेंद्र और दीपक

Devotee Experience - Myself, Bhupendra And Deepak से अनुवाद

कल हम सभी अहमदाबाद में हुए सीरियल बम ब्लास्ट की खबर सुन चुके हैं। मैं समाचार चैनलों के दृश्यों को देखकर भयभीत थी। आप सभी सोच रहे होंगे कि मैं साईं बाबा के ब्लॉग पर बम ब्लास्ट के बारे में क्यों लिख रही हूं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसे लिखने के कुछ अप्रत्यक्ष कनेक्शन हैं इन सीरियल ब्लास्ट से। वास्तव में मैंने बाबा के दो चमत्कारों को इन ब्लास्ट के माध्यम से देखा है। मेरे दो करीबी लोग जो मेरे साथ भावनात्मक रूप से जुड़े हैं वे उसी शहर में थे, लेकिन साईं बाबा के बच्चों का क्या कुछ बुरा हो सकता है। उनमें से एक मेरे मित्र हैं और दूसरा मेरा ममेरा भाई है। शिर्डी साईं बाबा को लेकर उनका अनुभव पहले से ही इस ब्लॉग पर उपलब्ध है और यह उसके आगे की घटना है।

पहला चमत्कार मेरे दोस्त भूपेन्द्र रावत के बारे में है। वह एक दिन पहले (24 जुलाई, 2008) को आधिकारिक बैठक (ऑफिसियल मीटिंग) में भाग लेने के लिए अहमदाबाद गए थे। मीटिंग दो दिनों की थी लेकिन बड़ौदा में उनके कुछ जरूरी काम होने के कारण उन्हें अगले दिन (25 जुलाई, 2008) को वापस लौटना था। उन्होंने अपने सीनियर से इस बारे में अनुरोध किया लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया गया। इसलिए भूपेंद्र, सहकर्मी और सीनियर मीटिंग के समापन के बाद बड़ौदा लौट रहे थे (26 जुलाई, 2008) लगभग 6:00 बजे। उसी समय ब्लास्ट की खबर आई थी।

मुझे पता नहीं था लेकिन मेरे मित्र ने किसी को बात करते हुए सुना था इसीलिए उसने मुझे फोन किया ये जानने के लिए कि क्या यह खबर सच है या सिर्फ एक अफवाह है। मैंने जल्दी ही मेरी टेलीविज़न शुरू किया और मुझे पता चला कि पहले ही चार सीरियल ब्लास्ट हो चुके है। मैंने तब उसे फोन करने की कोशिश की लेकिन सुरक्षा कारणों से टेलीफोन और मोबाइल सेवा बंद कर दी गई थी। मैंने उसे इस बारे में एक एसएमएस भी भेजा। पर वो भी उस तक नहीं पहुंचा। मैं 15-20 मिनटों तक कोशिश करती रही लेकिन फ़ोन नहीं लगा।

समाचार में और दो बम ब्लास्ट की खबर आई। मैं बोहत परेशान थी और मैं सिर्फ बाबा से उसे सुरक्षित रखने के लिए प्रार्थना करती रही। कुछ मिनट बाद मैंने फिर से फ़ोन लगाने की कोशिश की और हाँ इस बार मैंने फ़ोन की घंटी सुनी। उसने फोन उठाया और कहा कि वो लोग हाईवे पर थे। बस चालक ने बहुत चालाकी से मार्ग से बस घुमाकर बस को सुरक्षित रूप से हाईवे पर पहुचाया, हालांकि इसमें बहुत समय लगा। अहमदाबाद बड़ौदा से दो घंटे की दूरी पर है। वे सब लगभग रात 9:00 बजे बड़ौदा पहुंचे। यदि समय में थोडा सा भी परिवर्तन होता तो वो सब बड़ौदा में सुरक्षित रूप से नहीं पहुंच पाते। मुझे लगता है कि बाबा के प्रति विश्वास को बढ़ाने के लिए ही भूपेंद्र को बड़ौदा में वापस जाने की अनुमति नहीं मिली।

दूसरा अनुभव मेरे ममेरे भाई दीपक काले के संदर्भ में है, जो अहमदाबाद में एम.सी.ए कर रहा है। वहा वो अपने वर्ग के छात्र के साथ एक फ्लैट में रहता है। सौभाग्य से बम ब्लास्ट के दौरान वह अपने कमरे में ही था और वह बम ब्लास्ट के बारे में अनजान था। मेरी मां उसे फोन करने की कोशिश कर रही थी, जबकि मैं अपने दोस्त को फ़ोन करने में व्यस्त थी। वह हमें हर तीन चार दिन में फ़ोन करता है, इसलिए उसेने ऐसे ही फ़ोन किया। असल में वह अपने पिता को कॉल करने की कोशिश कर रहा था जो जामनगर (सौराष्ट्र क्षेत्र, गुजरात) के पास एक गांव में रहते है पर उनका फ़ोन नहीं लगा इसलिए उसने अपने पिता को यह संदेश देने के लिए कहा की वह काफी समय से फ़ोन लगा रहा है पर कॉल कनेक्ट नहीं हो पाया। मेरी मां ने उसे पूछा कि वह कहां है और बम ब्लास्ट के बारे में उसे बताया।

उसने कहा कि वह अपने कमरे में ही है और चिंता करने की कोई बात नहीं । उसने यह भी आश्वासन दिया कि वह बाहर नहीं जाएंगे। कुछ समय बाद खबर सामने आई कि तेरह सीरिअल बम ब्लास्ट हुए थे। मेरे मामाजी ने खबर देखते ही उसे फोन करने की कोशिश की पर फ़ोन नहीं लगा । वे सभी परेशान थे और वे मेरी मां को फोन करने ही जा रहे थे की उसी समय मेरी मां ने उन्हें फोन करके उन्हें उनके बेटे के बारे में सुचना देने का सोचा। मेरी माँ ने उन्हें उनके बेटे की सुरक्षा के बारे में बताया और उन्हें राहत मिली। क्या यह सब बाबा उनके बच्चों को बचाने के लिए उनके द्वारा की गयी व्यवस्था नहीं है। मैं इस पर दृढ़ विश्वास करती हूं और मुझे लगता है कि आप सभी को भी इसके बारे में कोई शक नहीं होगा।

मैं इस संकट की घडी में मेरे करीबी लोगों की देखभाल करने के लिए बाबा का धन्यवाद करती हूं !!!

इस कहानी का ऑडियो सुनें




Translated and Narrated By Rinki Transliterated By Supriya

© Sai Teri Leela - Member of SaiYugNetwork.com

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